बुजुर्गों में घुटनों का दर्द और पैरों की ऐंठन: सिर्फ उम्र का असर नहीं, इन कारणों पर दें ध्यान
बुजुर्गों में घुटनों के दर्द के साथ पैरों की ऐंठन को नजरअंदाज करना ठीक नहीं। यह सिर्फ उम्र का प्रभाव नहीं, बल्कि मांसपेशियों की कमजोरी, पानी की कमी या अन्य गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है।

द क्लिफ न्यूज़ | 6 सितंबर 2026
बुजुर्गों में दोनों घुटनों का ऑस्टियोआर्थराइटिस और पैरों या पिंडलियों में बार-बार होने वाली ऐंठन को अक्सर केवल उम्र बढ़ने का स्वाभाविक परिणाम मानकर अनदेखा कर दिया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या को केवल विटामिन या दर्द निवारक दवाओं तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे कई अन्य कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना और उनका सही उपचार करना आवश्यक है ताकि बुजुर्गों की गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता बनी रहे।
ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित बुजुर्ग अक्सर दर्द और जकड़न के कारण अपनी शारीरिक गतिविधियों को कम कर देते हैं। इसका सीधा प्रभाव जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियों की कमजोरी के रूप में सामने आता है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से ऐंठन की समस्या और गंभीर हो सकती है। इस स्थिति में पूर्ण आराम के बजाय, व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और दर्द के स्तर के अनुसार सुरक्षित और नियमित व्यायाम अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। चिकित्सकों और फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह पर प्रतिदिन 10-15 मिनट की हल्की सैर या स्थिर साइकिल चलाना फायदेमंद हो सकता है। धीरे-धीरे क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और पिंडली की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायामों को भी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
ऐंठन से राहत के घरेलू उपाय और सावधानियां
रात के समय होने वाली ऐंठन से परेशान रहने वाले बुजुर्गों के लिए सोने से पहले पिंडलियों और हैमस्ट्रिंग की हल्की स्ट्रेचिंग फायदेमंद हो सकती है। यदि ऐंठन अचानक शुरू हो जाए, तो घुटने को धीरे-धीरे सीधा करें और पैर की उंगलियों को अपनी ओर खींचें, इससे मांसपेशी को आराम मिल सकता है। इसके बाद हल्की मालिश भी राहत दे सकती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि स्ट्रेचिंग या व्यायाम करते समय यदि तेज दर्द हो तो उसे जबरदस्ती जारी न रखें।
जब ऐंठन बार-बार हो, लंबे समय तक बनी रहे या लगातार बढ़ रही हो, तो इसके संभावित कारणों की चिकित्सकीय जांच करवाना अत्यंत आवश्यक है। डॉक्टर रक्त में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर की जांच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, क्रिएटिनिन और गुर्दे की कार्यक्षमता की जांच भी की जा सकती है। कुछ मामलों में, विटामिन डी या विटामिन बी12 की कमी का भी पता लगाया जा सकता है। किसी भी विटामिन या खनिज सप्लीमेंट का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह और जांच के लंबे समय तक नहीं करना चाहिए।
वजन प्रबंधन और अन्य उपचार विकल्प
घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के मामलों में, यदि व्यक्ति का वजन अधिक है, तो सुरक्षित तरीके से वजन कम करने से घुटनों पर पड़ने वाले भार को काफी हद तक कम किया जा सकता है। गर्म सिकाई घुटनों की जकड़न में राहत प्रदान कर सकती है। घुटनों के दर्द के लिए, कुछ मरीजों को डॉक्टरी सलाह पर टॉपिकल (लगाने वाली) दर्द निवारक दवाएं भी उपयोगी साबित हो सकती हैं। चलने में अस्थिरता होने पर छड़ी का सही उपयोग सुरक्षा बढ़ा सकता है और प्रभावित घुटने पर अनावश्यक दबाव कम कर सकता है।
जब ऑस्टियोआर्थराइटिस की स्थिति इतनी गंभीर हो जाए कि दैनिक गतिविधियों, चलने-फिरने या सोने में लगातार बाधा उत्पन्न होने लगे और व्यायाम, वजन प्रबंधन तथा अन्य गैर-सर्जिकल उपचारों से पर्याप्त राहत न मिले, तब ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से जोड़ प्रत्यारोपण (Joint Replacement) या अन्य शल्य चिकित्सा विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
ऐंठन के उपचार में व्यक्तिगत दृष्टिकोण
पैरों की ऐंठन के उपचार में हर व्यक्ति के लिए एक ही समाधान लागू नहीं होता। यदि विटामिन ई का सेवन करने से कोई स्पष्ट लाभ नहीं मिल रहा है, तो केवल ऐंठन के लिए इसे जारी रखने का निर्णय डॉक्टर से विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया जाना चाहिए। इसी प्रकार, बुजुर्गों में क्विनिन का नियमित उपयोग आम तौर पर अनुशंसित नहीं है, क्योंकि इसके संभावित लाभ सीमित हो सकते हैं और गंभीर दुष्प्रभाव का जोखिम बना रहता है।
बुजुर्ग मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि उनका लक्ष्य पूर्ण विश्राम नहीं, बल्कि सुरक्षित और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखना होना चाहिए। घुटनों को उनकी क्षमता के अनुसार सक्रिय रखना, मांसपेशियों को मजबूत बनाना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित पोषण लेना और ऐंठन व दर्द के संभावित चिकित्सकीय कारणों की शीघ्र पहचान करना अत्यंत आवश्यक है। बार-बार दर्द या ऐंठन होने की स्थिति में, स्वयं दवा की मात्रा बढ़ाने के बजाय डॉक्टरी सलाह लेना सदैव अधिक सुरक्षित होता है।
तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता
यदि ऐंठन के साथ अचानक पैर में सूजन, लालिमा, असामान्य गर्माहट, गंभीर कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ या कोई नया न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दे, तो इसे सामान्य मांसपेशीय ऐंठन मानकर घर पर उपचार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना अनिवार्य है। सही कारण का पता लगाकर और नियमित देखभाल के माध्यम से ऑस्टियोआर्थराइटिस से प्रभावित बुजुर्गों की गतिशीलता, सुरक्षा और समग्र जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
