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बुजुर्गों में घुटनों का दर्द और पैरों की ऐंठन: नियमित व्यायाम है राहत का सही रास्ता

उम्र बढ़ने के साथ घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस और पैरों की ऐंठन सामान्य है, लेकिन इसे नजरअंदाज न करें। नियमित व्यायाम, सही पोषण और चिकित्सकीय सलाह से इन समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।

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बुजुर्गों में घुटनों का दर्द और पैरों की ऐंठन: नियमित व्यायाम है राहत का सही रास्ता

द क्लिफ न्यूज़ | 3 सितंबर 2026

बढ़ती उम्र के साथ बुजुर्गों में घुटनों का दर्द, विशेषकर ऑस्टियोआर्थराइटिस (OA) एक आम समस्या है। जब इसके साथ ही पिंडली या पैरों में बार-बार ऐंठन होने लगे, तो इसे केवल वृद्धावस्था का प्रभाव मानकर अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। इस स्थिति के पीछे कम शारीरिक गतिविधि, मांसपेशियों की कमजोरी, शरीर में पानी की कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स और दर्द के कारण चलने के तरीके में बदलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं। इन समस्याओं के प्रबंधन का लक्ष्य केवल दर्द कम करना नहीं, बल्कि बुजुर्गों की मांसपेशियों की ताकत, चलने की क्षमता और दैनिक जीवन में उनकी स्वतंत्रता को बनाए रखना भी है।

चिकित्सकों का मानना है कि पूर्ण आराम के बजाय, सुरक्षित और नियमित शारीरिक गतिविधि ऐसे मरीजों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। यदि मरीज की शारीरिक स्थिति अनुमति दे, तो प्रतिदिन 10 से 15 मिनट के लिए आरामदायक गति से टहलना या स्थिर साइकिल चलाना शुरू किया जा सकता है। व्यायाम की अवधि और तीव्रता मरीज की शारीरिक क्षमता और घुटनों के दर्द के स्तर के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए। फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में की जाने वाली विशेष कसरत, जैसे क्वाड्रिसेप्स, हैमस्ट्रिंग और पिंडली की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम, ऑस्टियोआर्थराइटिस में दर्द को कम करने और शारीरिक कार्यक्षमता में सुधार लाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ऐंठन से निजात पाने के उपाय

रात में होने वाली ऐंठन की समस्या को कम करने के लिए सोने से पहले पिंडली और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों की हल्की स्ट्रेचिंग (खिंचाव) की जा सकती है। यदि अचानक ऐंठन आ जाए, तो घुटने को धीरे-धीरे सीधा करते हुए पैर और पंजे को पिंडली की ओर ऊपर की ओर खींचना राहत दे सकता है। इसके बाद प्रभावित मांसपेशी की हल्की मालिश भी फायदेमंद हो सकती है। कुछ अध्ययनों से यह भी संकेत मिला है कि वृद्ध लोगों में रात के समय नियमित स्ट्रेचिंग से ऐंठन की आवृत्ति और गंभीरता में कमी लाई जा सकती है।

चिकित्सीय जांच और दवाओं की समीक्षा

यदि ऐंठन की समस्या लगातार बनी रहे, तो केवल विटामिन या सप्लीमेंट लेना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में चिकित्सक रक्त में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स और किडनी की कार्यक्षमता से संबंधित क्रिएटिनिन तथा eGFR की जांच की सलाह दे सकते हैं। आवश्यकतानुसार विटामिन D और B12 की कमी का भी मूल्यांकन किया जा सकता है। यह भी आवश्यक है कि मरीज द्वारा ली जा रही दवाओं की समीक्षा की जाए, क्योंकि मूत्रवर्धक दवाएं या स्टेटिन जैसी कुछ दवाएं मांसपेशियों से संबंधित समस्याओं को बढ़ा सकती हैं। ऐसी किसी भी दवा को स्वयं बंद करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।

वजन नियंत्रण और अन्य सहायक उपचार

ऑस्टियोआर्थराइटिस के प्रभावी प्रबंधन के लिए वजन अधिक होने पर उसे नियंत्रित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वजन कम करने से घुटनों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम हो जाता है, जिससे दर्द में राहत मिल सकती है। जोड़ों में जकड़न और कठोरता की स्थिति में गर्म सिकाई फायदेमंद साबित हो सकती है। जिन मरीजों के लिए यह उपयुक्त हो, वे चिकित्सकीय सलाह पर टॉपिकल नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) का उपयोग कर सकते हैं। चलने में अस्थिरता होने पर सही तरीके से छड़ी का इस्तेमाल करना सुरक्षा को बढ़ाता है और घुटने पर पड़ने वाले भार को कम करता है।

सर्जरी का विकल्प

जब ऑस्टियोआर्थराइटिस इतना गंभीर हो जाए कि गैर-सर्जिकल उपचारों के बावजूद चलना, सोना या दैनिक गतिविधियों को करना लगातार प्रभावित होने लगे, तब ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से आगे के उपचार के लिए परामर्श लेना चाहिए। इस स्थिति में जोड़ प्रतिस्थापन (joint replacement) जैसी सर्जरी का मूल्यांकन किया जा सकता है।

अवैज्ञानिक उपचारों से बचाव

विटामिन E को ऐंठन के नियमित उपचार के तौर पर मानना उचित नहीं है, विशेषकर जब इसका कोई स्पष्ट लाभ न मिल रहा हो। इसी प्रकार, वृद्ध मरीजों में क्विनिन का नियमित उपयोग सामान्यतः इसलिए टाला जाता है क्योंकि इसके लाभ सीमित होने के साथ-साथ गंभीर दुष्प्रभाव होने का जोखिम रहता है।

बुजुर्ग मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि उम्र बढ़ने का अर्थ पूर्ण विश्राम या निष्क्रियता नहीं है। सुरक्षित और नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन, संतुलित पोषण, मांसपेशियों को मजबूत बनाना और उचित स्ट्रेचिंग पर ध्यान देना आवश्यक है। बार-बार दर्दनिवारक या विटामिन लेने के बजाय, ऐंठन और घुटनों के दर्द के वास्तविक कारणों की पहचान कर उनका उचित उपचार कराना अधिक महत्वपूर्ण है। यदि लक्षण लगातार बने रहें या असामान्य हों, तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए।