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ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप में भारतीय मूल के युवा खिलाड़ियों का जलवा

11 वर्षीय बोधना सिवानंदन ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन बनीं, जबकि 17 वर्षीय श्रेयस रॉयल ओवरऑल ओपन चैंपियनशिप के सबसे युवा विजेता बने।

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ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप में भारतीय मूल के युवा खिलाड़ियों का जलवा

द क्लिफ न्यूज़ | कोवेंट्री | 11 अगस्त 2026

कोवेंट्री में संपन्न हुई 2026 ब्रिटिश शतरंज चैंपियनशिप में भारतीय मूल के दो युवा खिलाड़ियों, 11 वर्षीय बोधना सिवानंदन और 17 वर्षीय श्रेयस रॉयल ने अपने असाधारण प्रदर्शन से इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया है। इन दोनों खिलाड़ियों ने न केवल प्रतिष्ठित प्रतियोगिताएं जीतीं, बल्कि अपने-अपने वर्ग में सबसे कम उम्र के विजेता बनकर भी कीर्तिमान स्थापित किए।

बोधना सिवानंदन, जिनकी उम्र महज 11 साल है, ब्रिटेन की अब तक की सबसे कम उम्र की महिला शतरंज चैंपियन बन गई हैं। उन्होंने रैपिड शतरंज प्लेऑफ के एक रोमांचक मुकाबले में आयरलैंड की 14 वर्षीय तृषा कन्यमाराला को मात दी। इस जीत के साथ, बोधना ने यूके ओपन विमेंस ब्लिट्ज और ब्रिटिश विमेंस रैपिड खिताबों के बाद इसी वर्ष अपने खिताबों की हैट्रिक पूरी की है। यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है। बोधना ने कोविड लॉकडाउन के दौरान शतरंज खेलना शुरू किया था, जब उन्हें एक शतरंज बोर्ड मिला था।

श्रेयस रॉयल ने रचा इतिहास

दूसरी ओर, 17 वर्षीय श्रेयस रॉयल ने ओवरऑल ओपन चैंपियनशिप का खिताब जीतकर प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे कम उम्र के विजेता होने का गौरव हासिल किया है। बेंगलुरु के रहने वाले श्रेयस का यह प्रदर्शन असाधारण रहा। उनके परिवार को विशेष रूप से ब्रिटेन में रहने की अनुमति मिली थी, जिसका सदुपयोग उन्होंने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर किया। उनकी जीत ने यह साबित किया कि युवा प्रतिभाएं सही अवसर मिलने पर विश्व मंच पर अपनी छाप छोड़ सकती हैं।

इन दोनों युवा खिलाड़ियों की सफलता ने ब्रिटिश शतरंज जगत में नई ऊर्जा का संचार किया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। यह भारतवंशियों की प्रतिभा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बढ़ती धाक का एक और प्रमाण है।