ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की UNSC सुधार मुहिम को यूएन का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भारत की वकालत को यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि 1945 के ढांचे को 2026 की वास्तविकता के अनुरूप ढालने की जरूरत है।

द क्लिफ न्यूज़ | न्यूयॉर्क | 13 सितंबर 2026
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार की भारत की मुहिम को अब संयुक्त राष्ट्र का भी अप्रत्यक्ष समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने UNSC में सुधारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों का समर्थन करते हुए कहा है कि वर्तमान ढांचा 21वीं सदी की सच्चाइयों को प्रतिबिंबित नहीं करता है और इसमें सुधार की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने सुधारों के लिए आम सहमति बनाने में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका पर जोर दिया। दुजारिक ने माना कि सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बदलाव की बेहद जरूरत है, जो 1945 के बजाय 2026 की वैश्विक हकीकत को दर्शाए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिए गए अपने बयान में, दुजारिक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि महासचिव लगातार सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल वर्तमान महासचिव का ही दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि उनके पूर्ववर्ती भी इसी मत के थे। दुजारिक ने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र के शांति और सुरक्षा ढांचे का मुख्य स्तंभ सुरक्षा परिषद ही है।
सुरक्षा परिषद का वर्तमान ढांचा और 21वीं सदी की आवश्यकता
स्टीफन दुजारिक ने कहा, “अगर आप देखें कि परिषद अभी कैसे बनी है, जिसमें 5 स्थायी सदस्य हैं, तो यह अब 21वीं सदी की सच्चाई को नहीं दिखाती है। सुरक्षा परिषद हो, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं हों या अन्य सभी तरह की अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं, उन्हें 1945 के बजाय 2026 की सच्चाई को दिखाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “अब समय आ गया है कि हम इस संगठन को दुनिया की सच्चाई के हिसाब से ढालें ताकि यह सच में सबकी नुमाइंदगी करने वाला और ज्यादा असरदार बन सके।”
दुजारिक के इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी के उन तर्कों की पुष्टि करता है जो उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में उठाए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि 'ग्लोबल साउथ' को नियम तय करने वाला बनना होगा, न कि केवल नियम पालन करने वाला, ताकि वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके।
ब्रिक्स और वैश्विक दक्षिण के हितों की रक्षा
ब्रिक्स सम्मेलन के संदर्भ में, यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि 'ग्लोबल साउथ' के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में व्यापक सुधारों के साथ-साथ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत बनाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था किसी विशेष देश समूह के पक्ष में झुकी हुई नहीं होनी चाहिए और सभी देशों को समान अवसर मिलने चाहिए।
दुजारिक ने वैश्विक बहुपक्षवाद के प्रति संयुक्त राष्ट्र महासचिव के गहरे समर्थन को दोहराया। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश आपसी तनाव को कम करने के लिए क्षेत्रीय समूहों के बीच सकारात्मक समझौते करेंगे। ब्रिक्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए, प्रवक्ता ने कहा कि यह समूह वैश्विक आबादी और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने भारत की अध्यक्षता की सराहना की, इसे पुल बनाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिहाज से अत्यंत सकारात्मक बताया।
आतंकवाद के विरुद्ध दो-टूक लड़ाई की वकालत
इस अवसर पर, स्टीफन दुजारिक ने आतंकवाद को एक वैश्विक खतरा बताया, जिससे सभी देशों को मिलकर लड़ना होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पास आतंकवाद से निपटने के लिए कई संस्थाएं और कार्यक्रम हैं जो सदस्य देशों की सहायता करते हैं। दुजारिक ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसके विनाशकारी परिणाम दुनिया के हर देश पर पड़ते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का UNSC सुधारों पर जोर
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों को अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले पर चर्चा को एक निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट परिणामों के दायरे में लाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह सबसे पीछे की पंक्ति में है। हमें इस 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलना होगा - एक ऐसा मंच जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो।”
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के भीतर मतदान शक्ति, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि को गति देने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका निभानी चाहिए।
