ब्रिक्स घोषणा-पत्र जारी: आतंकवाद पर कड़ा रुख, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती देने पर जोर
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया गया। इसमें आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक व्यापार और शासन व्यवस्था जैसे मुद्दों पर साझा रुख लिया गया।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 12 सितंबर 2026
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ हुआ। 140 बिंदुओं वाले इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ में आतंकवाद, पश्चिम एशिया संकट, गाजा की स्थिति, वैश्विक व्यापार, आर्थिक प्रतिबंधों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार जैसे प्रमुख मुद्दों पर सदस्य देशों के साझा रुख को रेखांकित किया गया है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन को ब्रिक्स सहयोग को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को "विस्तार में व्यापक और उद्देश्य में अधिक मजबूत" बताया। उन्होंने सदस्य देशों के नेताओं का सर्वसम्मति से घोषणा-पत्र अपनाने पर आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स का उद्देश्य किसी भी देश के विरुद्ध खड़ा होना नहीं है, बल्कि वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना है। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के देशों का आह्वान किया कि वे केवल नियमों का पालन करने वाले न बनें, बल्कि नियमों को आकार देने वाले सक्रिय पक्ष के रूप में उभरें।
वैश्विक शासन में सुधार और प्रतिनिधित्व की वकालत
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार को वर्तमान समय की एक अनिवार्य आवश्यकता बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें विकासशील देशों की भागीदारी को बढ़ाया जाए। प्रधानमंत्री ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को, जिसे उन्होंने विशेषाधिकारों की "पिरामिड" संरचना बताया, साझेदारी के एक मंच में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने ब्रिक्स के लिए दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग की रूपरेखा तैयार करने और अगले दो दशकों के लिए समूह की दिशा तय करने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया।
आतंकवाद के विरुद्ध शून्य सहनशीलता का आह्वान
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में आतंकवाद के प्रति ब्रिक्स देशों के कड़े रुख को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया। घोषणा-पत्र में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के विरुद्ध 'शून्य सहनशीलता' का अपना रुख दोहराया। साथ ही, उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया।
पश्चिम एशिया संकट और गाजा की मानवीय स्थिति पर चिंता
पश्चिम एशिया की नाजुक स्थिति पर ब्रिक्स देशों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। घोषणा-पत्र में सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया गया है। ब्रिक्स नेताओं ने संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई, जो क्षेत्र में शांति और स्थिरता की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है।
आर्थिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार पर जोर
आर्थिक मोर्चे पर, ब्रिक्स देशों ने एकतरफा टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं और एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई। सदस्य देशों का मानना है कि ऐसी नीतियां वैश्विक व्यापार, विशेष रूप से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करती हैं। घोषणा-पत्र में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता को दोहराया गया, ताकि विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को और मजबूत किया जा सके और वैश्विक आर्थिक शासन में अधिक संतुलन स्थापित हो सके।
ऊर्जा सुरक्षा और न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण की आवश्यकता
ऊर्जा क्षेत्र में, ब्रिक्स ने एक न्यायसंगत, व्यवस्थित और समावेशी ऊर्जा संक्रमण की आवश्यकता पर बल दिया। घोषणा-पत्र में विकासशील देशों के ऊर्जा मिश्रण में जीवाश्म ईंधन की वर्तमान भूमिका को स्वीकार किया गया है, साथ ही ऊर्जा सुरक्षा, स्थिर आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने और महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। यह सदस्य देशों की विविध ऊर्जा आवश्यकताओं और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत की अध्यक्षता का मूल्यांकन और भविष्य की योजनाएं
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन के दौरान, 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए। घोषणा-पत्र में भारत की अध्यक्षता में किए गए प्रयासों की सराहना की गई। साथ ही, 2027 में चीन की ब्रिक्स अध्यक्षता और 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए चीन को समर्थन देने की प्रतिबद्धता भी जताई गई।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र विभिन्न राजनीतिक और रणनीतिक हितों वाले देशों के बीच आम सहमति बनाने में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उभरा है। इस मंच के माध्यम से भारत ने न केवल आतंकवाद के विरुद्ध एक स्पष्ट संदेश दिया है, बल्कि वैश्विक दक्षिण की निर्णायक भूमिका, बहुपक्षवाद के महत्व और एक अधिक संतुलित वैश्विक शासन व्यवस्था की वकालत भी की है।
