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बॉक्सर फ्रैक्चर: साधारण दिखने वाली चोट, हाथ की पकड़ पर गंभीर असर

हाथ की पांचवीं मेटाकार्पल हड्डी का फ्रैक्चर, जिसे बॉक्सर फ्रैक्चर कहते हैं, यदि इसमें घूर्णीय विकृति हो तो हाथ की पकड़ पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

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बॉक्सर फ्रैक्चर: साधारण दिखने वाली चोट, हाथ की पकड़ पर गंभीर असर

द क्लिफ न्यूज़ | 20 सितंबर 2026

हाथ की पांचवीं मेटाकार्पल हड्डी में होने वाला फ्रैक्चर, जिसे आमतौर पर 'बॉक्सर फ्रैक्चर' के नाम से जाना जाता है, दिखने में भले ही एक सामान्य चोट लगे, लेकिन इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर जब इसमें घूर्णीय विकृति (rotational deformity) उत्पन्न हो जाए। यह चोट हाथ की पकड़ और उसकी समग्र कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस प्रकार के फ्रैक्चर का सही समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार न केवल हड्डी को ठीक करने के लिए, बल्कि हाथ की सामान्य गतिविधियों को बहाल करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बॉक्सर फ्रैक्चर, पांचवीं मेटाकार्पल हड्डी की गर्दन (neck) पर होने वाला एक विशेष प्रकार का फ्रैक्चर है। यह अक्सर तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी कठोर वस्तु पर मुक्का मारता है, जिससे हड्डी पर अचानक अक्षीय बल (axial force) लगता है। इस चोट के मुख्य लक्षणों में छोटी उंगली (अल्नर साइड) की ओर दर्द, सूजन और छूने पर अत्यधिक कोमलता शामिल हैं। कई बार चोट के बाद हाथ की सामान्य आकृति भी बिगड़ जाती है, जिसमें पांचवीं मेटाकार्पल हड्डी का उभार कम या चपटा दिखाई देने लगता है। मरीजों को मुट्ठी बंद करने या किसी वस्तु को मजबूती से पकड़ने में भी कठिनाई होती है और दर्द का अनुभव होता है।

घूर्णीय विकृति: एक गंभीर चिंता

इस फ्रैक्चर की सबसे चिंताजनक जटिलताओं में से एक घूर्णीय विकृति का उत्पन्न होना है। जब पांचवीं मेटाकार्पल हड्डी टूटती है और उसका संरेखण (alignment) बिगड़ जाता है, तो यह न केवल हड्डी के सीधे जुड़ने में बाधा डालता है, बल्कि उंगलियों के सामान्य मूवमेंट को भी प्रभावित करता है। घूर्णीय विकृति का मतलब है कि टूटी हुई हड्डी इस तरह से जुड़ती है कि उंगलियां सामान्य रूप से एक-दूसरे के समानांतर रहने के बजाय एक-दूसरे को पार करने लगती हैं या गलत दिशा में मुड़ने लगती हैं।

घूर्णीय विकृति की पहचान के लिए, डॉक्टर मरीज से अपनी उंगलियों को मोड़ने के लिए कहते हैं। सामान्य स्थिति में, उंगलियों के सिरे हथेली के आधार (स्कैफॉइड क्षेत्र) की ओर जाने चाहिए और उन्हें एक-दूसरे को पार नहीं करना चाहिए। यदि छोटी उंगली दूसरी उंगलियों की तुलना में घूमती हुई दिखती है या वे एक-दूसरे को क्रॉस करती हैं, तो यह घूर्णीय विकृति का स्पष्ट संकेत है। इस स्थिति का पता लगाना उपचार योजना को तय करने में एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि यह सीधे तौर पर हाथ की पकड़ और उंगलियों की कार्यात्मक क्षमता से जुड़ा होता है।

निदान और उपचार के विकल्प

फ्रैक्चर की गंभीरता, उसके कोण, विस्थापन (displacement) और किसी भी प्रकार की घूर्णीय विकृति का पता लगाने के लिए एक्स-रे सबसे महत्वपूर्ण जांच है। आमतौर पर हाथ के एपी (anterior-posterior), पार्श्व (lateral) और तिरछे (oblique) दृश्यों के एक्स-रे किए जाते हैं। इन एक्स-रे से हड्डी के टूटने की सटीक जगह, हड्डी का कितना छोटा होना, घूर्णन की मात्रा और किसी अन्य संबंधित चोट का मूल्यांकन किया जाता है। यह भी देखा जाता है कि फ्रैक्चर हाथ के जोड़ (joint) तक तो नहीं फैला है। हालांकि, केवल एक्स-रे में दिखाई देने वाले कोण के आधार पर उपचार तय करना पर्याप्त नहीं है। मरीज की उंगली का कार्यात्मक संरेखण (functional alignment) भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

यदि फ्रैक्चर स्थिर है, उसमें न्यूनतम विस्थापन है और कोई घूर्णीय विकृति नहीं है, तो गैर-ऑपरेटिव (non-operative) उपचार को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें आमतौर पर अल्नर-गटर स्प्लिंट (ulnar-gutter splint) या कास्ट का उपयोग किया जाता है। उपचार के दौरान, मेटाकार्पोफैलेंजियल (MCP) जोड़ों को हल्की फ्लेक्सन (flexion) की स्थिति में रखा जाता है। हड्डी के स्थिर होने और जुड़ना शुरू होने के बाद, धीरे-धीरे उंगलियों की नियंत्रित गति (controlled range of motion) को बढ़ाया जाता है। इसका उद्देश्य लंबे समय तक जकड़न (stiffness) और कार्यक्षमता में कमी से बचना होता है। आवश्यकता पड़ने पर, उपचार की प्रगति की निगरानी के लिए फॉलो-अप एक्स-रे भी किए जाते हैं।

सर्जरी का निर्णय कब लिया जाता है

जब फ्रैक्चर विस्थापित (displaced) या अस्थिर (unstable) होता है, तो हड्डी को उसकी सही स्थिति में लाने के लिए रिडक्शन (reduction) की आवश्यकता पड़ सकती है। रिडक्शन के बाद, फ्रैक्चर की स्थिरता और संरेखण के आधार पर स्प्लिंट, कास्ट या अन्य प्रकार के फिक्सेशन (fixation) का निर्णय लिया जाता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में, ऑपरेटिव फिक्सेशन (operative fixation) यानी सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। इन परिस्थितियों में लगातार या अस्वीकार्य घूर्णीय विकृति, फ्रैक्चर का बहुत अधिक छोटा होना या विकृत होना, खुला फ्रैक्चर (open fracture), तंत्रिका या रक्त वाहिकाओं (neurovascular) को चोट, या अन्य जटिल हाथ की चोटें शामिल हैं। यदि फ्रैक्चर जोड़ के अंदर है और उसकी सही अनुरूपता (congruity) को बहाल करने की आवश्यकता है, तो भी सर्जिकल उपचार अनिवार्य हो जाता है।

विशेषज्ञ की सलाह महत्वपूर्ण

यह समझना महत्वपूर्ण है कि पांचवीं मेटाकार्पल हड्डी में लगने वाली हर चोट को 'बॉक्सर फ्रैक्चर' नहीं कहा जाता। बॉक्सर फ्रैक्चर विशेष रूप से पांचवीं मेटाकार्पल की गर्दन का फ्रैक्चर होता है। यदि चोट पांचवीं मेटाकार्पल के शाफ्ट (shaft) या बेस (base) में होती है, तो तकनीकी रूप से यह बॉक्सर फ्रैक्चर नहीं कहलाता, भले ही चोट लगने का कारण समान हो।

सही समय पर जांच, हड्डी का उचित संरेखण सुनिश्चित करना और प्रभावी पुनर्वास (rehabilitation) के माध्यम से अधिकांश मरीज हाथ की सामान्य कार्यक्षमता को पुनः प्राप्त कर सकते हैं। यदि चोट के बाद लगातार दर्द, सूजन बनी रहती है, उंगली टेढ़ी हो जाती है या किसी वस्तु को पकड़ने में कठिनाई महसूस होती है, तो किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ या हाथ के सर्जन से तुरंत परामर्श लेना आवश्यक है।