BMC का ₹3,611 करोड़ का बजट ठप: 8 महीने बाद भी 90% विकास कार्य कागजों में अटके, टेंडर से आगे नहीं बढ़े प्रोजेक्ट
भोपाल नगर निगम (BMC) द्वारा वित्त वर्ष 2025–26 के लिए पारित किए गए ₹3,611 करोड़ के बजट को आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन घोषित...

भोपाल नगर निगम (BMC) द्वारा वित्त वर्ष 2025–26 के लिए पारित किए गए ₹3,611 करोड़ के बजट को आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन घोषित 90% से अधिक विकास कार्य कागज़ों से बाहर ही नहीं आ पाए। अधिकांश प्रोजेक्ट टेंडर स्तर पर ही अटके हैं और 30 प्रमुख प्रस्तावों में से एक भी पूरा नहीं हुआ।
जमीन पर काम लगभग ठप, सिर्फ दो प्रोजेक्ट शुरू
बजट में बड़े-बड़े कार्यक्रमों, भूमिपूजन और घोषणाओं के बावजूद, असल काम बेहद धीमा रहा।
अब तक केवल दो प्रोजेक्ट शुरू हो पाए हैं—
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₹200 करोड़ की नाली निर्माण योजना (NDRF फंड)
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₹400 करोड़ की PMAY हाउसिंग परियोजना
ये दोनों केंद्रीय योजनाओं से वित्तपोषित हैं, जबकि निगम के अपने बजट के कार्य ठप पड़े हैं।
विकास रुका, पर दान जारी: 300 से अधिक संगठनों को ₹3 करोड़ बांटे
विडंबना यह है कि विकास परियोजनाएँ आगे नहीं बढ़ रहीं, लेकिन BMC ने पिछले आठ महीनों में 300 से अधिक संगठनों (NGO, प्रेस क्लब आदि) को सार्वजनिक धन से ₹3 करोड़ से ज्यादा का दान दे दिया है।
जनहित का वादा भी अधर में—Mayor City Bus Pass अभी तक शुरू नहीं
छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेयर सिटी बस पास योजना, जिसे एक प्रमुख लोक-कल्याणकारी कदम के रूप में घोषित किया गया था, अभी तक लागू नहीं की गई है।
हेरिटेज गेट: भूमिपूजन के बाद भी फाइलों में दबे
18 मई को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समरधा (होशंगाबाद रोड) पर प्रस्तावित भोज–नर्मदा द्वार का भूमिपूजन किया था।
घोषित दोनों बड़े हेरिटेज गेट—
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बोज–नर्मदा गेट (लागत ₹5 करोड़, समयसीमा 6 माह)
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विक्रमादित्य गेट (इंदौर–भोपाल रोड)
अभी भी टेंडर प्रक्रिया में फंसे हैं।
इसी प्रकार बैरसिया रोड, रायसेन रोड, कोलार रोड, विदिशा रोड और मुबारकपुर पर बनने वाले गेटों पर भी कोई प्रगति नहीं हुई।
2025–26 बजट आवंटन, जिनमें प्रगति ‘शून्य’ के करीब
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₹30 करोड़ — हेरिटेज प्रवेश द्वार
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₹15 करोड़ — महिला सशक्तिकरण योजना
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₹1.5 करोड़ — फिल्ट्रेशन यूनिट पर सोलर प्लांट
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₹3 करोड़ — ग्रीन स्पेस और जल संरचनाएँ
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₹4 करोड़ — अयोध्या बायपास पर स्विमिंग पूल
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₹32 करोड़ — विसर्जन घाट विकास
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₹5 करोड़ — स्वच्छ भारत मिशन 2.0
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₹12 करोड़ — पार्क विकास
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₹20 करोड़ — गीता भवन
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₹42.5 करोड़ — वार्ड प्लानिंग फंड
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₹2.1 करोड़ — ज़ोन प्रेसिडेंट फंड
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₹10 करोड़ — GIS ब्यूटीफिकेशन
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₹10 करोड़ — मेयर-इन-काउंसिल फंड
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₹15 करोड़ — विधानसभा क्षेत्रों में विकास
ज्यादातर मदों में शून्य या नाममात्र प्रगति दिखाई देती है।
विधायकों तक नहीं पहुँच रहे फंड
कांग्रेसी विधायक आतिफ अकील के मुताबिक:
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इस वर्ष ₹15 करोड़ प्रस्तावित थे,
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अब तक ₹1 भी नहीं मिला।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल पूरे साल में सिर्फ ₹15–20 लाख ही जारी हुए — और लगभग सभी BMC क्षेत्रों में यही स्थिति रही।
बजट के ‘लैप्स’ होने का खतरा
BMC की विपक्षी नेता शभिस्ता ज़ाकी ने कहा:
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पिछले साल 60% बजट लैप्स हो गया था
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इस साल 70% बजट अव्ययित रह जाने का खतरा है
वहीं, मेयर मालती राय ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि “अधिकांश विकास कार्य प्रगति पर हैं” और सभी पार्षद व विधायक अपने प्रस्तावित फंड प्राप्त करेंगे।
विशेष विश्लेषण: क्या संकेत देता है यह ठहराव?
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नागरिक बुनियादी ढांचे में देरी से शहर के विकास की गति पर प्रभाव।
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भूमिपूजन-प्रधान राजनीति की आलोचना—घोषणाएँ ज्यादा, क्रियान्वयन कम।
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विधानसभा क्षेत्रों में फंड न पहुँचने से स्थानीय विकास पर सीधा असर।
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बजट लैप्स होने से अगले वर्ष के लिए भी फंड आवंटन प्रभावित हो सकता है।
