BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
National

सरकारी विभागों पर BMC की ₹260 करोड़ की देनदारी: सैन्य कैंट और रेल सबसे बड़े बकायेदार, वसूली पर निगम की चिंता गहरी

भोपाल नगर निगम (BMC) की आर्थिक स्थिति इन दिनों भारी दबाव में है। निगम पिछले कई वर्षों से शहर में स्थित दर्जनभर से अधिक सरकारी...

Dec 12
3 मिनट में पढ़ें
सरकारी विभागों पर BMC की ₹260 करोड़ की देनदारी: सैन्य कैंट और रेल सबसे बड़े बकायेदार, वसूली पर निगम की चिंता गहरी

भोपाल नगर निगम (BMC) की आर्थिक स्थिति इन दिनों भारी दबाव में है। निगम पिछले कई वर्षों से शहर में स्थित दर्जनभर से अधिक सरकारी विभागों से सेवा शुल्क (Service Charge) के रूप में करीब ₹260 करोड़ की राशि वसूल नहीं कर पाया है। लगातार नोटिस, पत्राचार और विभागीय स्तर पर फॉलो-अप के बावजूद यह रकम बढ़ती जा रही है। सबसे बड़ा बकाया सैन्य कैंट (Military Cantonment) पर है, जिसके हिस्से की देनदारी ₹120 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।


क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

सेवा शुल्क वह राशि है जिसे नगर निगम शहर में कचरा प्रबंधन, सड़क सफाई, स्ट्रीट–लाइट, सीवरेज और अन्य नागरिक सेवाओं के बदले विभिन्न संस्थानों से लेता है। सरकारी विभागों से यह रकम न मिलने का सीधा असर शहर की बुनियादी सुविधाओं और निगम की वित्तीय क्षमता पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह राशि समय पर वसूल हो जाए, तो निगम कई अटकी हुई परियोजनाओं को गति दे सकता है।


कौन-कौन हैं बड़े बकायेदार?

विभागबकाया (₹)
सैन्य कैंट120 करोड़
रेल प्रशासन41 करोड़
लोक निर्माण विभाग (PWD)5 करोड़
पर्यटन विभाग1 करोड़
पीएचई3 करोड़
भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA)10 करोड़
हाउसिंग बोर्ड1 करोड़+

निगम अधिकारियों का कहना है कि कुछ विभागों ने आंशिक भुगतान शुरू किया है, लेकिन अधिकांश की देनदारी वर्षों से जस की तस पड़ी है।


वसूली की कोशिशें, लेकिन गति धीमी

निगम के राजस्व अधिकारियों के अनुसार, हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में विभागों को भुगतान अनुस्मारक भेजे जाते हैं, लेकिन जवाबदेही कम दिखाई देती है। राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि,
“शहर की प्रमुख सरकारी संस्थाओं से शुल्क न मिलने से हमारे नियमित संचालन पर असर पड़ता है। कई बार भुगतान फाइलें आगे बढ़ती हैं, फिर रुक जाती हैं।”

हाल ही में गैस राहत विभाग ने ₹40 लाख की राशि जमा की है। BDA से भी भुगतान को लेकर बातचीत जारी है।


निगम अधिकारियों का पक्ष

बीएमसी ज़ोन–3 के ज़ोनल अधिकारी राजेंद्र अहिरवार ने बताया कि सैन्य कैंट को नोटिस भेजे जा चुके हैं और संबंधित फाइल को उच्चाधिकारी स्तर पर पुनः मंगाया गया है। उन्होंने कहा,
“कई विभागों की भुगतान प्रक्रिया चालू है। हमारी कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके, देनदारियों का निपटान हो।”


वित्तीय विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

शहरी प्रशासन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समस्या नई नहीं है। सरकारी विभागों पर बकाया वसूली देश की कई नगरपालिकाओं के लिए एक बड़ी चुनौती रही है।
शहरी वित्त विशेषज्ञ डॉ. अनीता पांडे के अनुसार,
“सेवा शुल्क के भुगतान को लेकर कई विभाग कानूनी दायित्वों या बजट मदों के विवाद का हवाला देते हैं। लेकिन इससे नगर निगमों की वित्तीय आत्मनिर्भरता कमजोर होती है।”

उनका सुझाव है कि राज्य स्तर पर एकीकृत निर्देश जारी कर भुगतान प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया जाए।


शहर पर इसका असर

  • स्वच्छता और अवसंरचना परियोजनाओं के लिए फंड की कमी

  • पुरानी सड़कों और स्ट्रीट–लाइटिंग के रखरखाव में धीमी गति

  • नई शहरी योजनाओं पर रोक या देरी

  • निगम पर ऋण लेने का दबाव बढ़ना

निगम का अनुमान है कि यदि बकाया रकम का आधा हिस्सा भी वसूल हो जाए, तो शहर की चल रही कई परियोजनाओं में भारी सुधार हो सकता है।