बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन: भारत की बढ़ती कूटनीतिक धमक का प्रदर्शन
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में भारत ने अपनी कूटनीतिक हैसियत को मजबूत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाया और 'एससीओ सभ्यता संवाद मंच' की मेजबानी मिलने से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा मिला है।

संवाददाता: शाश्वत तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | बिश्केक | 2 सितंबर 2026
किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन ने यूरेशियाई क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है। इस बहुपक्षीय मंच पर भारत का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, जिनके साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के प्रति कड़े रुख के साथ-साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग के नए रास्ते तलाशे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद के प्रति 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति पर ज़ोर दिया और कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने विवादों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को एकमात्र प्रभावी मार्ग बताया। प्रधानमंत्री ने कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को रेखांकित किया। इस सम्मेलन में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि यह रही कि उसे 'एससीओ सभ्यता संवाद मंच' के पहले संस्करण की मेजबानी का अवसर मिला, जो मध्य एशिया के साथ भारत के ऐतिहासिक सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को पुनर्जीवित करने में सहायक होगा।
आतंकवाद पर मुखर भारत, कूटनीति पर जोर
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 'एक्स' पर साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार की शिथिलता या दोहरे मापदंड को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने एससीओ के सदस्य देशों के साथ मिलकर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सांस्कृतिक कूटनीति को नई उड़ान
‘एससीओ सभ्यता संवाद मंच’ की मेजबानी मिलना भारत के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता है। इसके माध्यम से भारत सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को आधुनिक स्वरूप में पुनर्जीवित करने की दिशा में नेतृत्व करेगा। यह पहल यूरेशियाई देशों के साथ भारत के सभ्यतागत जुड़ाव को और गहरा करेगी।
विदेश मंत्री की सक्रिय द्विपक्षीय कूटनीति
सम्मेलन के इतर, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मध्य एशियाई देशों, रूस, चीन और ईरान के शीर्ष नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में व्यापार, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। विशेष रूप से, ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह के विस्तार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मसलों पर कूटनीतिक सहमति बनाने में अहम प्रगति हासिल हुई। इन बैठकों ने विभिन्न देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए अवसर खोलने का मार्ग प्रशस्त किया।
बिश्केक घोषणापत्र में भारत के प्रस्तावों को प्रमुखता
सम्मेलन के अंत में जारी 'बिश्केक घोषणापत्र' में भारत द्वारा उठाए गए प्रस्तावों को प्रमुखता से शामिल किया गया। जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संरक्षण और परमाणु सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे यूरेशियाई देशों के बीच सहयोग के लिए एक नया ढांचा तैयार हुआ है। यह घोषणापत्र एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और साझा चुनौतियों से निपटने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
