बिलासपुर: पुलिस कस्टडी में युवक की मौत, CBI ने संभाली जांच
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI की टीम बिलासपुर पहुंची, पुलिस कस्टडी में युवक की मौत के मामले में जांच शुरू। सिविल लाइन थाने और सेंट्रल जेल से जुटाए जा रहे हैं दस्तावेज।

द क्लिफ न्यूज़ | बिलासपुर | 15 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस हिरासत में एक युवक की संदिग्ध मौत के मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI की चार सदस्यीय एक टीम विशेष रूप से इस मामले की तह तक जाने के लिए बिलासपुर पहुंची है। टीम ने पहुंचते ही मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और पुलिस रिकॉर्ड की पड़ताल करना शुरू कर दिया है।
CBI की टीम ने सबसे पहले सिविल लाइन थाने का दौरा किया, जहाँ उन्होंने केस डायरी, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित अन्य रिकॉर्ड्स और मजिस्ट्रियल जांच से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद, जांच दल सेंट्रल जेल भी पहुँचा। जेल में, युवक को रखे जाने और उसकी वहां की स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड्स की गहनता से पड़ताल की गई। CBI का मुख्य उद्देश्य पुलिस हिरासत से लेकर युवक को जेल भेजे जाने तक की पूरी घटनाक्रम की कड़ियों को सटीकता से जोड़ना है।
36 घंटे की हिरासत और गंभीर आरोप
इस गंभीर मामले में मृतक युवक के परिजनों द्वारा पुलिस पर संगीन आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का दावा है कि युवक को सीपत थाने में लगभग 36 घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। आरोप है कि इस दौरान उसके साथ पुलिस द्वारा क्रूरतापूर्ण मारपीट की गई, जिससे उसकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई।
परिजनों के अनुसार, युवक की जानलेवा हालत होने के बावजूद उसे समय पर आवश्यक और उचित चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई गईं। बाद में, पुलिस ने उसे आबकारी अधिनियम से संबंधित मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। यह घटनाक्रम पुलिसिया कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब हिरासत में लिए गए व्यक्ति के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई हो।
जेल में बिगड़ी तबीयत और मौत
जानकारी के अनुसार, जेल भेजे जाने के तुरंत बाद युवक की तबीयत और भी बिगड़ गई। उसकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मृत्यु के पश्चात, उसके परिजनों ने पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।
परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि युवक की मौत स्वाभाविक नहीं थी, बल्कि पुलिस हिरासत में कथित तौर पर हुई मारपीट और प्रताड़ना के कारण उसकी स्वास्थ्य स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि उसकी जान चली गई। यह आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है और न्याय की मांग को बल देता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI जांच
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए, न्यायिक प्रक्रिया के तहत और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद, इस पूरे प्रकरण की जांच CBI को सौंपी गई है। CBI की चार सदस्यीय टीम अब घटनाक्रम से जुड़े सभी दस्तावेजी साक्ष्यों को जुटाने में लग गई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
CBI की जांच में युवक को हिरासत में लेने की प्रक्रिया, थाने में उसके द्वारा बिताया गया समय, उसकी मेडिकल जांच की तारीखें और रिपोर्ट, आबकारी अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई, जेल भेजे जाने का निर्णय और अंततः अस्पताल में इलाज के दौरान हुई उसकी मृत्यु – इन सभी महत्वपूर्ण पड़ावों की पूरी तरह से जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का भी प्रयास कर रही है कि हिरासत के दौरान युवक के साथ क्या हुआ था, क्या उसे वास्तव में पीटा गया था, उसकी मेडिकल जांचें कब-कब हुईं और जेल भेजे जाने से ठीक पहले उसकी स्वास्थ्य स्थिति कैसी थी।
जांच से सामने आएंगी कड़ियां
फिलहाल, CBI टीम ने आवश्यक दस्तावेजों को एकत्र करना शुरू कर दिया है और जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। यह उम्मीद की जा रही है कि CBI द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की निर्णायक कार्रवाई तय की जाएगी। इस जांच से पुलिस की भूमिका और युवक की मौत के वास्तविक कारणों पर से पर्दा उठने की संभावना है, जिससे न्याय की उम्मीद जगी है।
