बीएचयू के सुश्रुत विभाग की पहली महिला अध्यक्ष बनीं डॉ. रश्मि गुप्ता
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सुश्रुत विभाग में पहली बार डॉ. रश्मि गुप्ता ने विभागाध्यक्ष का पद संभाला है। यह महिला नेतृत्व और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संवाददाता: श्याम मोहन उपाध्याय की खास रिपोर्टिंग
द क्लिफ न्यूज़ | 30 अगस्त 2026
द क्लि
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्रतिष्ठित सुश्रुत विभाग के इतिहास में एक नए अध्याय का शुभारंभ हुआ है, जहाँ पहली बार किसी महिला को विभागाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. रश्मि गुप्ता ने इस पद को ग्रहण कर चिकित्सा शिक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस नियुक्ति को चिकित्सा जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
यह ऐतिहासिक अवसर आयुर्वेद विभाग में आयोजित प्रो. पी. जे. देशपांडे मेमोरियल लेक्चर के दौरान सामने आया। इस व्याख्यान में मुख्य अतिथि और वक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. हरिशंकर शुक्ला ने डॉ. गुप्ता की नियुक्ति को न केवल चिकित्सा क्षेत्र बल्कि सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक पड़ाव करार दिया। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति बदलती सामाजिक मान्यताओं और चिकित्सा शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता का प्रमाण है।
आचार्य सुश्रुत की परंपरा में महिला नेतृत्व
प्रो. हरिशंकर शुक्ला ने अपने उद्बोधन में भारतीय चिकित्सा परंपरा के प्रणेता आचार्य सुश्रुत के शल्य चिकित्सा को व्यवस्थित और वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सुश्रुत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाले संस्थान में एक महिला का विभागाध्यक्ष बनना, चिकित्सा शिक्षा के परिदृश्य में महिलाओं की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाता है। प्रो. शुक्ला ने इस बात पर भी जोर दिया कि आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी से जोड़कर चिकित्सा क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए जा सकते हैं।
आयुर्वेद की समग्रता और आधुनिक विज्ञान का संगम
नए विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए आयुर्वेद की ताकत को उसकी समग्र चिकित्सा दृष्टि में बताया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा, उचित आहार, दैनिक दिनचर्या और जीवनशैली के महत्व पर भी प्रकाश डालता है। डॉ. गुप्ता ने इस बात पर बल दिया कि आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धांतों का आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ अध्ययन और प्रयोग करके वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और उपयोगी बनाया जा सकता है।
चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में समन्वय की आवश्यकता
चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक, प्रो. एस. एन. शंखवार ने इस अवसर पर भारतीय चिकित्सा ज्ञान को शोध और वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतारने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच संवाद और समन्वय में वृद्धि से चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को एक नई दिशा मिल सकती है। वरिष्ठ प्रो. कुलभूषण सिंह ने आचार्य सुश्रुत के शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में दिए गए सिद्धांतों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि ये सिद्धांत नई रोशनी प्रदान करते हैं।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर विभाग के कई वरिष्ठ शिक्षक और संकाय प्रमुख, जिनमें प्रो. सी. एस. पांडे, प्रो. एस. जे. गुप्ता, प्रो. शानी सिंह, प्रो. विजयलक्ष्मी, प्रो. पी. के. गोस्वामी, डॉ. ए. के. द्विवेदी, डॉ. आर. के. जैसवाल, डॉ. अनिल और संकाय प्रमुख प्रो. के. रंग मूर्ति शामिल थे, उपस्थित रहे।
