भोपाल रेल मंडल: 13 पैक्ड पानी के सैंपल फेल, 'रेल नीर' भी मानकों पर खरा नहीं
भोपाल रेल मंडल की विशेष जांच में पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर के 13 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें 'रेल नीर' जैसे ब्रांड भी शामिल हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 18 अगस्त 2026
भोपाल रेल मंडल द्वारा यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। जून में एक विशेष जांच अभियान के दौरान, कुल 13 पैक्ड पानी के नमूनों को निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं पाया गया, जिसके बाद उन्हें पीने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। इन असफल नमूनों में भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के लोकप्रिय ब्रांड 'रेल नीर' के साथ-साथ 'एक्वियस' जैसे अन्य ब्रांड भी शामिल बताए गए हैं।
यह विशेष जांच अभियान जून 2026 में चलाया गया था, जिसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बिकने वाले बोतलबंद पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करना था। यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान वे बड़े पैमाने पर इन उत्पादों पर निर्भर रहते हैं। नमूनों की जांच कैली-लैब्स प्राइवेट लिमिटेड की प्रयोगशाला में की गई, जिसकी रिपोर्ट में 13 नमूनों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।
पैक्ड पानी की गुणवत्ता पर सवालिया निशान
जांच के दौरान विभिन्न ब्रांडों के पैक्ड पानी के नमूनों का संग्रह किया गया था। इन नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट में 13 की संख्या में सैंपल मानकों को पूरा नहीं कर सके। इन असफलताओं ने रेलवे प्रशासन के बीच बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेष रूप से, गर्मी और उमस भरे मौसम में यात्रियों के बीच बोतलबंद पानी की मांग बढ़ जाती है, ऐसे में इन उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है।
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है, लेकिन यदि आपूर्ति किए जा रहे उत्पाद गुणवत्ता के निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते हैं, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न कर सकता है। यह घटना रेलवे परिसरों में बिकने वाले पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर की नियमित और कठोर निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
'रेल नीर' ब्रांड के शामिल होने से मामले की गंभीरता बढ़ी
इस पूरे मामले में आईआरसीटीसी के 'रेल नीर' ब्रांड का भी जांच में फेल होना एक महत्वपूर्ण पहलू है। 'रेल नीर' रेलवे यात्रियों के बीच व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला और विश्वसनीय माना जाने वाला ब्रांड है, जिसके उत्पादन के लिए देशभर में कई संयंत्र संचालित हैं। हालांकि, किसी विशेष बैच या नमूने का परीक्षण में असफल होना यह इंगित नहीं करता कि पूरा ब्रांड ही असुरक्षित है। गुणवत्ता परीक्षण अक्सर एक विशिष्ट उत्पाद के बैच से संबंधित होते हैं।
रेलवे प्रशासन के लिए यह एक चुनौती है कि वह न केवल 'रेल नीर' जैसे ब्रांडों की गुणवत्ता सुनिश्चित करे, बल्कि बाजार में उपलब्ध अन्य पैक्ड पानी के आपूर्तिकर्ताओं पर भी कड़ी नजर रखे। नियामकीय प्रक्रिया और अंतिम कार्रवाई हमेशा जांच रिपोर्ट, नमूने की प्रकृति और संबंधित नियमों पर आधारित होती है।
कार्रवाई और निगरानी की आवश्यकता
13 नमूनों के गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने के बाद, रेलवे प्रशासन के सामने अब संबंधित विक्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं और उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर आगे की कार्रवाई करने की एक बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। रेलवे परिसरों में बिकने वाले पैक्ड पानी की गुणवत्ता को निरंतर सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग और प्रयोगशाला परीक्षणों को एक अनिवार्य प्रक्रिया के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, यात्रियों को भी यह सलाह दी जाती है कि वे बोतलबंद पानी खरीदते समय बोतल की सील, पैकिंग की स्थिति, निर्माण एवं समाप्ति तिथि (mfg. & expiry date) और लेबल पर दी गई जानकारी की सावधानीपूर्वक जांच करें। किसी भी संदिग्ध उत्पाद या गुणवत्ता संबंधी समस्या की स्थिति में, यात्रियों को पानी का सेवन करने से बचना चाहिए और तुरंत संबंधित रेलवे अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज करानी चाहिए। भोपाल रेल मंडल की यह विशेष जांच एक बार फिर रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर व्यापक उपायों की आवश्यकता पर बल देती है।
