भोपाल: निगम की सीलिंग कार्रवाई पर उठे सवाल, रसूखदारों को बचाने का आरोप
भोपाल में आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई विवादों में है। छोटे व्यापारियों को निशाना बनाने और बड़े प्रतिष्ठानों को बचाने के आरोप लगे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 31 अगस्त 2026
भोपाल में आवासीय भूखंडों पर नियम विरुद्ध संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई पक्षपातपूर्ण बताई जा रही है। याचिकाकर्ताओं और रहवासियों ने आरोप लगाया है कि निगम बड़े और रसूखदार प्रतिष्ठानों को नजरअंदाज कर रहा है, जबकि छोटे व्यापारियों पर गाज गिर रही है। इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में भी मामला पहुंचा है, जहां निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने 5 अगस्त को हुई सुनवाई में सभी नगर निगमों को 15 सितंबर तक आवासीय क्षेत्रों से व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह हटाने का आदेश दिया था। इस आदेश के पालन के क्रम में नगर निगम भोपाल द्वारा कार्रवाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में यह कार्यवाही केवल सर्वे और गिनी-चुनी इमारतों तक सीमित बताई जा रही है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा है। उनकी मांग है कि नियम सभी के लिए समान हों और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए, अन्यथा वे सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे।
न्यायालय की सख्ती और निगम पर आरोप
पिछली सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन ने प्रदेश सरकार द्वारा गठित कमेटी को भंग करते हुए नाराजगी जताई थी। जब अमेकस क्युरी (न्यायालय के सहायक) अधिवक्ता ए. के. सिन्हा ने बताया कि नगर निगम द्वारा सील किए गए भवनों को स्टे ऑर्डर के हवाला देते हुए पुनः खोल दिया गया है, तो न्यायालय ने तत्काल आदेश पारित कर जबलपुर न्यायालय के स्टे ऑर्डर को निरस्त कर दिया। साथ ही, सीलिंग कार्रवाई के तुरंत बाद खुले संस्थानों पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
सर्वोच्च न्यायालय ने नियम विरुद्ध भू-उपयोग और अवैध निर्माण के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। 5 अगस्त को भोपाल नगर निगम द्वारा दाखिल एक्शन टेकन रिपोर्ट में बताया गया था कि भोपाल में आवासीय परिसरों में एक हजार से ज्यादा अवैध निर्माण चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है और अब तक 100 से ज्यादा भवनों को सील किया गया है। हालांकि, रहवासियों ने इस रिपोर्ट को असत्य बताते हुए कहा है कि सील हुए भवनों की वास्तविक संख्या काफी कम है।
अरेरा कॉलोनी में विशेष उपेक्षा का आरोप
अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने विशेष रूप से निगम की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि अरेरा कॉलोनी में एक भी अवैध मॉल, शोरूम या पब पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक कि मंदिर के सामने संचालित शराब की दुकान भी यथावत चल रही है, जबकि एक नमकीन व्यापारी को सील कर दिया गया। रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। कुछ जगहों पर नाममात्र की सीलिंग और बाकी जगहों पर नोटिस की खानापूर्ति की जा रही है। रहवासियों ने अपनी शिकायतों पर कब कार्रवाई होगी, यह सवाल नगर निगम की टीम से भी पूछा है।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि अवैध निर्माण के कारण अरेरा कॉलोनी के रहवासियों का जीवन दुश्वार हो गया है। भूमाफियाओं के लालच के चलते आम आदमी का सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है और अवैध इमारतों ने फुटपाथ तक निगल लिए हैं। पार्किंग की सुविधा न होने के कारण कॉलोनी के अंदर जाम की स्थिति बनी रहती है। इन समस्याओं के विरोध में रहवासियों ने टॉर्च मार्च, कैंडल मार्च और बारिश में पैदल मार्च कर अपना विरोध दर्ज कराया है, लेकिन निगम की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सामूहिक संघर्ष और भविष्य की रणनीति
एक अन्य रहवासी लवनिश भाटी ने बताया कि वे लंबे समय से जिला प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन नगर निगम और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते भूमाफिया इतने मजबूत हो गए हैं कि मंदिर के सामने शराब की दुकान जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
भूमाफियाओं के खिलाफ इस मुहिम का नेतृत्व कर रही संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति को भोपाल की कई अन्य आवासीय समितियों का भी साथ मिल रहा है। इस मुहिम में गौतम नगर, कोलार रोड, नेहरू नगर, त्रिलंगा, रोहित नगर, रचना नगर, बावडिया, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी, शक्ति नगर और शाहपुरा जैसी समितियां भी शामिल हैं। पूर्व आईएएस कविंद्र कियावत, पूर्व डीजीपी अरुण गुर्ंतु, पूर्णेंदु शुक्ला, सुभाष पांडे, मोहन खरपते, सोमकांत उमलकर, अपर्णा वाशिष्ट, शुभ्रा गोयल, नीरज गुलाटी, कमल राठी, विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी जैसे प्रमुख लोग इस समिति का हिस्सा हैं। आगामी रणनीति के तहत, निर्माणाधीन भवनों पर तत्काल रोक लगाने और उन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी, जिनके क्षेत्रों में अवैध निर्माण हुए हैं।
