भोपाल में 'ये शाम मस्तानी': किशोर कुमार को युवा प्रतिभाओं ने दी श्रद्धांजलि
मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग ने रवीन्द्र भवन, भोपाल में महान गायक किशोर कुमार की स्मृति में 'ये शाम मस्तानी' गीत-संगीत संध्या का आयोजन किया। इस आयोजन में युवा कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति से समां बांधा।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 4 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने भारतीय सिनेमा के महान गायक, अभिनेता और बहुमुखी प्रतिभा के धनी स्वर्गीय किशोर कुमार की जन्मस्मृति में भोपाल के रवीन्द्र भवन में 'ये शाम मस्तानी' नामक एक भव्य संगीत संध्या का आयोजन किया। मंगलवार को आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय फिल्म संगीत की उस अमूल्य विरासत को नमन करना था, जिसने दशकों से करोड़ों श्रोताओं के दिलों को अपनी धुन और संवेदनाओं से जोड़ा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के माननीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी थे। उनके साथ संचालक संस्कृति श्री एन.पी. नामदेव और उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला भी मौजूद रहीं। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और सुविख्यात संगीत निर्देशक एवं गायक श्री अनु मलिक तथा श्री अनिल श्रीवास्तव का स्वागत किया। इस अवसर पर एलएनसीटी ग्रुप के 'आगाज बैंड' और सेज यूनिवर्सिटी के बैंड को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने किशोर कुमार के गीतों का भरपूर आनंद लिया।
सांस्कृतिक चेतना और महापुरुषों का स्मरण
माननीय संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश शासन का संस्कृति विभाग इस सिद्धांत पर कार्य करता है कि किसी समाज की सांस्कृतिक चेतना तभी जीवित रहती है, जब वह अपने महापुरुषों और महान कलाकारों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास करे। इसी उद्देश्य से प्रदेश भर में विभिन्न महान विभूतियों की स्मृति में आयोजन किए जाते हैं। 'ये शाम मस्तानी' इसी गौरवशाली परंपरा की एक सशक्त कड़ी है।
मंत्री श्री लोधी ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि संस्कृति विभाग इस संगीत संध्या का आयोजन लगातार दस वर्षों से कर रहा है, और यह आयोजन हर वर्ष संगीत प्रेमियों के लिए एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पुण्यभूमि अनेक महान विभूतियों की जन्मस्थली रही है, और इसी धरती ने भारतीय सिनेमा को किशोर कुमार जैसा अनुपम कलाकार दिया, जिसकी प्रतिभा का कोई एक परिचय पर्याप्त नहीं हो सकता। किशोर कुमार केवल एक पार्श्वगायक नहीं थे, वे स्वयं में एक संपूर्ण कला संस्थान थे। उनकी आवाज़ में भावनाओं की ऐसी विविधता थी, जो प्रेम, विरह, हास्य, करुणा, उत्साह और जीवन-दर्शन - सभी को सहजता से व्यक्त कर देती थी।
अनु मलिक और अनिल श्रीवास्तव ने बांधा समां
गीत-संगीत संध्या का शुभारंभ प्रख्यात संगीतकार और गायक श्री अनु मलिक ने अपने खास अंदाज में किया। भोपाल को तहजीब का शहर बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां आकर मन प्रसन्न हो जाता है। उन्होंने संस्कृति विभाग का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इतने श्रेष्ठ कार्यक्रम का आयोजन किया, खासकर उस महान गायक की स्मृति में, जिन्हें सुनकर वे संगीत की ओर आकर्षित हुए और जिनके साथ काम करने का उन्हें अवसर मिला। श्री मलिक ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत लोकप्रिय गीत 'ये काली काली आँखें...' से की और गीत के निर्माण की यात्रा भी साझा की। इसके बाद उन्होंने 'एक गरम चाय की प्याली हो', 'जवानी फिर न आए' और 'ऊंची है बिल्डिंग' जैसे गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इसके पश्चात मंच संभाला 'के फॉर किशोर' के विजेता और सुप्रसिद्ध गायक श्री अनिल श्रीवास्तव ने। उन्होंने महान गायक किशोर कुमार के सदाबहार गीतों से ऐसी शाम सजाई, जिसे भोपाल के संगीत प्रेमी लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। श्री श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के शीर्षक गीत 'ये शाम मस्तानी...' को बहुत ही अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके उपरांत उन्होंने 'रिमझिम गिरे सावन', 'एक अजनबी हसीना से', 'मेरे सामने वाली खिड़की में', 'ये जो मोहब्बत है', 'सलाम ए इश्क़' जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी। गीत-संगीत की यह शाम देर रात तक चली और श्रोताओं ने अंत तक संगीत का आनंद लिया।
युवा प्रतिभाओं का उत्साहपूर्ण प्रदर्शन
इस कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि युवा प्रतिभाओं की सक्रिय सहभागिता रही। संस्कृति विभाग द्वारा 3 अगस्त 2026 को आयोजित अंतर-महाविद्यालयीन संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से भोपाल के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के युवा कलाकारों को अपना मंच प्रदान किया गया था। इन प्रतियोगिताओं से चयनित एलएनसीटी ग्रुप का 'आगाज बैंड' और सेज विश्वविद्यालय का बैंड संगीत संध्या में अपनी प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किए गए थे।
सबसे पहले सेज विश्वविद्यालय के बैंड ने मंच संभाला। उन्होंने 'हाल क्या है दिलों का', 'हमें तुमसे प्यार कितना', 'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे' और 'ओम शांति ओम' जैसे गीतों को एक नए और ताज़गी भरे अंदाज़ में प्रस्तुत किया। इसके बाद एलएनसीटी ग्रुप के 'आगाज बैंड' ने प्रस्तुति दी। उन्होंने 'बचना ए हसीनों', 'नीले नीले अम्बर पर', 'मेरे सपनों की रानी' और 'ओ मेरे दिल के चैन' जैसे गीतों से दर्शकों का दिल जीत लिया और माहौल में रंग भर दिया। इन युवा कलाकारों के आत्मविश्वासपूर्ण प्रदर्शन ने यह साबित किया कि किशोर कुमार की विरासत आज भी युवाओं को प्रेरित कर रही है और वे इसे अपने अनूठे अंदाज़ में सहेजने का प्रयास कर रहे हैं।
