भोपाल में श्रीमद् देवी भागवत कथा का द्वितीय दिवस: भक्तिमय माहौल में गूंजे जयकारे
भोपाल में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का दूसरा दिन भक्तिमय रहा। कथावाचक आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने सृष्टि रचना में देवी शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डाला।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 12 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महर्षि शिक्षा संस्थान में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का द्वितीय दिवस भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण रहा। वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी डॉ. गिरीश जी के संरक्षण में आयोजित इस महायज्ञ के दूसरे दिन कथा स्थल पर बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित हुए। संपूर्ण वातावरण मां जगदंबा के जयकारों और भक्तिमय भजनों से जीवंत हो उठा।
द्वितीय दिवस की कथा का शुभारंभ मंगलाचरण, वैदिक मंत्रोच्चार, व्यासपीठ पूजन और गुरु पूजन के साथ हुआ। इसके उपरांत, व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने कथा को आगे बढ़ाया। उन्होंने देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों, प्रकृति और पुरुष के संवाद के महत्व, तथा सृष्टि की रचना में मां शक्ति की केंद्रीय भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
दिव्य प्रसंगों और भजनों से मंत्रमुग्ध श्रोता
आचार्य डॉ. त्रिपाठी ने अपने प्रवचन में पौराणिक आख्यानों और दार्शनिक विचारों का समागम करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि किस प्रकार आदिशक्ति ही सृष्टि का मूल कारण हैं और उन्हीं से प्रकृति तथा पुरुष का उद्भव हुआ है। यह संवाद ब्रह्मांड की उत्पत्ति और संचालन के गहन रहस्यों को स्पष्ट करता है। कथा के दौरान प्रस्तुत किए गए मनमोहक देवी गीतों और भजनों ने भक्तों को भावविभोर कर दिया, जिस पर श्रोता झूम उठे और भक्ति रस में लीन हो गए। महर्षि उत्सव भवन 'या देवी सर्वभूतेषु...' (वह देवी जो सभी प्राणियों में...) और 'सर्वमंगलगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके' (हे कल्याणकारी देवी, जो सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं) जैसे पवित्र मंत्रों की ध्वनि से सुवासित हो उठा, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा था। इन मंत्रों के उच्चारण मात्र से वातावरण में एक अलौकिक शांति और चेतना का अनुभव हो रहा था।
आचार्य त्रिपाठी ने देवी के विभिन्न रूपों की महिमा का भी वर्णन किया, जिसमें मां दुर्गा, मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के स्वरूपों का उल्लेख किया गया। उन्होंने बताया कि कैसे प्रत्येक रूप विशिष्ट शक्तियों का प्रतीक है और किस प्रकार भक्त अपनी-अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु इन स्वरूपों की आराधना करते हैं। प्रकृति और पुरुष के संवाद के माध्यम से उन्होंने सृष्टि के संतुलन और जीवन के चक्र को समझाया, जिसमें मां शक्ति की भूमिका सर्वोपरि है। यह विवेचन श्रोताओं को जीवन के गूढ़ सत्यों से परिचित करा रहा था, जिससे वे अपनी आध्यात्मिक यात्रा को और गहराई से समझ सकें।
आयोजन के दूसरे दिन कथा के विश्राम के उपरांत आरती का संपन्न हुआ। इस ज्ञानयज्ञ में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी भाग ले रहे हैं, जो देवी भागवत की कथा के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। यह आयोजन भोपाल में धार्मिक चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां प्रतिदिन भक्तजन बड़ी संख्या में आकर देवी के पावन चरित्र का श्रवण कर रहे हैं। यह श्रीमद् देवी भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश भी फैला रहा है। आगामी दिनों में भी कथा के कई और दिव्य प्रसंगों के श्रवण का लाभ भक्तों को मिलेगा, जिससे उनकी आस्था और दृढ़ होगी।
