भोपाल में शिक्षक दिवस पर सम्मान और कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन
भोपाल के बाबूलाल गौर शासकीय महाविद्यालय में शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर 2026 को शिक्षकों का सम्मान और कवि सम्मेलन हुआ। संस्कृति संचालनालय व सोसायटी ऑफ एनजीओ अवेयरनेस ने सहयोग किया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 5 सितंबर 2026
भोपाल के बाबूलाल गौर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भेल में शिक्षक दिवस, 5 सितंबर 2026, के उपलक्ष्य में एक भव्य शिक्षक सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से किया गया, जिसमें शिक्षाविदों, साहित्यकारों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। संस्कृति संचालनालय, मध्यप्रदेश, कार्यक्रम का मुख्य प्रायोजक था, जबकि सोसायटी ऑफ एनजीओ अवेयरनेस, अवधपुरी, भेल, भोपाल, सहयोगी संस्था के रूप में उपस्थित रही।
अतिथियों का स्वागत एवं दीप प्रज्वलन
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार जैन की अध्यक्षता में हुआ। सुप्रसिद्ध कवि श्री संजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सोसायटी ऑफ एनजीओ अवेयरनेस के अध्यक्ष श्री महेन्द्र प्रसाद शर्मा, श्रीमती मंजू शर्मा और बालिका अंशिका पाण्डेय विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुई। भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी पुष्पांजलि अर्पित की गई। महाविद्यालय की छात्रा शशि वंशकार ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि मुस्कान ठाकरे ने नृत्य के माध्यम से गुरु वंदना की। नन्ही अंशिका पाण्डेय के मधुर भजन ने समागम को भक्तिमय बना दिया।
शिक्षकों का सम्मान: कृतज्ञता का प्रतीक
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शिक्षक सम्मान समारोह था, जहाँ सोसायटी ऑफ एनजीओ अवेयरनेस के अध्यक्ष श्री महेन्द्र प्रसाद शर्मा ने सबसे पहले महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार जैन को सम्मानित किया। इसके पश्चात्, महाविद्यालय के लगभग 50 शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर और उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह ने शिक्षक समुदाय के प्रति गहरी कृतज्ञता, आदर और सम्मान की भावना को बलशाली रूप से अभिव्यक्त किया। यह शिक्षकों के अथक प्रयासों और समाज में उनके अमूल्य योगदान को स्वीकार करने का एक विनम्र प्रयास था।
कवि सम्मेलन: साहित्य की सरगम
शिक्षक सम्मान के उपरांत, एक जीवंत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के स्वरचित साहित्य मंच के विद्यार्थियों, श्रीया विश्वकर्मा, मनन दीक्षित, प्राची विश्वकर्मा और तुषार पाण्डेय ने गुरुओं को समर्पित अपनी स्वरचित कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया, जिसने युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया। भोपाल के शायर श्री नितेश ने अपनी मार्मिक शायरी “हे नमन गुरुवर तुम्हें स्वीकार हो” प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने भरपूर सराहा।
मुख्य अतिथि, सुप्रसिद्ध कवि श्री संजय सिंह, ने अपनी प्रस्तुतियों से कवि सम्मेलन को एक नई ऊंचाई दी। उन्होंने अपनी बहुचर्चित गीत, “सच बात पूछती हूँ, बताना ना बाबूजी, छुपाना ना बाबूजी, क्या याद मेरी आती नहीं!”, से काव्य पाठ का आरम्भ किया। इस भावपूर्ण रचना ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया और कई श्रोताओं की आँखों में आँसू आ गए। इसके पश्चात, उन्होंने अपनी एक अन्य लोकप्रिय कविता “हाय मेरे लाल, कैसा दिन ये दिखाया” प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने अत्यंत सराहना और तालियों के साथ स्वीकार किया। श्री सिंह की संवेदनशील और मर्मस्पर्शी प्रस्तुतियों ने कवि सम्मेलन को एक अविस्मरणीय अनुभव बना दिया।
विद्यार्थियों का प्रोत्साहन एवं आभार
संस्था सचिव सतीश पुरोहित ने स्वागत उद्बोधन दिया और संस्था की ओर से विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दस विद्यार्थियों को पारितोषिक प्रदान कर उनके उत्साहवर्धन किया। इस कार्य से न केवल विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिला, बल्कि उनकी प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का सफल और प्रभावशाली संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कमलेश सिंह नेगी ने किया। कार्यक्रम के अंत में, स्वरचित साहित्य मंच की छात्रा श्रीया विश्वकर्मा ने सभी अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इस आयोजन की सफलता को और बढ़ाया।
शिक्षक दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। इसने विद्यार्थियों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतिभाओं के प्रदर्शन के लिए भी एक सशक्त माध्यम प्रदान किया। इस समारोह ने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को रेखांकित किया और उपस्थित सभी लोगों के हृदयों में शिक्षा तथा शिक्षकों के प्रति आदर की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।
