भोपाल मास्टर प्लान 2047: हजारों आपत्तियां, रहवासी अवैध निर्माणों के नियमितीकरण पर अड़े
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के मसौदे पर शहरवासियों ने हजारों आपत्तियां दर्ज कराई हैं। मुख्य विरोध आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के नियमितीकरण और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार को लेकर है, जिसे वे विनाशकारी बता रहे हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 22 अक्टूबर 2026
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के मसौदे को लेकर शहरवासी लामबंद हो गए हैं। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में हजारों नागरिकों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) कार्यालय में पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। रहवासियों ने प्रस्तावित योजना में आवासीय क्षेत्रों के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने, अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण पर रोक लगाने और मसौदे में मौजूद विरोधाभासों को दूर करने की पुरजोर मांग की है। उनकी मुख्य चिंता शहर के तालाबों, जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण के संरक्षण को लेकर है।
अरेरा कॉलोनी, गौतम नगर, रोहित नगर, रचना नगर, बावड़िया, साकेत नगर, भेल, कोटरा, लालघाटी, शक्ति नगर, शाहपुरा, कोलार रोड, नेहरू नगर सहित शहर के विभिन्न इलाकों के नागरिकों ने सामूहिक रूप से अपनी आवाज उठाई है। इस विरोध में पूर्व आईएएस अधिकारी कवेंद्र कियावत, अरुण गुर्टू, याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी, लवनीश भाटी और विभिन्न स्थानीय संस्थाओं के प्रमुख शामिल हैं।
अवैध निर्माणों के नियमितीकरण पर कड़ा ऐतराज
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने भोपाल विकास योजना 2047 के बिंदु 15.38 का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें आवासीय परिसर में संचालित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव है, जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्णतः उल्लंघन करता है। त्रिपाठी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से ऐसे व्यावसायिक गतिविधियों को सील करने और स्वीकृत मानचित्रों के विपरीत बने निर्माणों को तोड़ने का आदेश दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान में ऐसे प्रावधान भूमाफियाओं को प्रोत्साहित करने और कानून का उल्लंघन करने वाले प्रतीत होते हैं। अरेरा कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण और 'मार्केट स्ट्रीट' जैसे प्रावधानों को आवासीय शांति, यातायात, पार्किंग, हरियाली और नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।
पर्यावरण संरक्षण और कानूनी अनुपालन की मांग
रहवासियों ने मास्टर प्लान के मसौदे में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण से संबंधित प्रावधानों को अध्याय 15.38 से हटाने की मांग की है। साथ ही, RG-3 की परिभाषा और मिश्रित भूमि उपयोग से जुड़े विरोधाभासों को दूर कर स्पष्ट नियम बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुरूप फुटपाथ, पार्किंग और आवश्यक सड़क सुविधाएं विकसित करने, स्वीकृत लेआउट के अनुसार पार्कों और खुले स्थानों को संरक्षित रखने तथा बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र, हरित क्षेत्रों और टाइगर मूवमेंट जोन में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले निर्माण संबंधी प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की भी मांग उठाई है। रहवासियों का मानना है कि भोपाल का विकास पर्यावरण संरक्षण, नागरिकों के जीवन के अधिकार और कानून के पालन को प्राथमिकता देकर होना चाहिए, न कि आवासीय क्षेत्रों पर अतिरिक्त व्यावसायिक दबाव डालकर।
तकनीकी खामियों और यातायात प्रबंधन पर भी चिंता
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने मसौदे की तकनीकी और भाषाई खामियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विकास योजना की प्रतियां धुंधली हैं और अंग्रेजी प्रारूप के लिंक पर भी हिंदी दस्तावेज खुलने में समस्या आ रही है। समिति ने दोनों भाषाओं में स्पष्ट और सुपाठ्य प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए फ्लाईओवर और प्रमुख मार्गों की ठोस योजना के अभाव को एक बड़ी कमी बताया गया है। अरेरा कॉलोनी में आवासीय भूखंडों पर बढ़ती अवैध व्यावसायिक गतिविधियों से यातायात का दबाव लगातार बढ़ने का भी उल्लेख किया गया है।
अस्तित्व पर खतरा और वैकल्पिक सुझाव
मसौदे में पश्चिमी बायपास के निर्माण, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र, हरित क्षेत्र एवं टाइगर मूवमेंट क्षेत्र में निर्माण की अनुमति और FAR में वृद्धि के प्रस्तावों को भोपाल के विकास की दिशा में नहीं, बल्कि विनाश की दिशा में कदम बताया गया है। समिति ने चेतावनी दी है कि इन प्रस्तावों के कारण 2047 तक भोपाल का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इसके विकल्प के रूप में, समिति ने मेट्रो रीजन प्लान के तहत व्यावसायिक गतिविधियों को भोपाल प्लान एरिया के अतिरिक्त मेट्रो रीजन क्षेत्र में विस्तारित और प्रेरित करने का सुझाव दिया है, ताकि शहर के आवासीय क्षेत्रों पर दबाव कम हो और राजधानी की गरिमा के अनुरूप विकास हो सके।
समिति ने मांग की है कि मास्टर प्लान 2047 को अंतिम रूप देने से पहले सभी आपत्तियों पर पारदर्शी ढंग से विचार किया जाए, पर्यावरण और जलस्रोतों का संरक्षण प्राथमिकता बने, और अवैध निर्माणों को नियमित करने के बजाय न्यायालय के आदेशानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे इस गंभीर विषय को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
