भोपाल के करुणाधाम आश्रम में त्रिदिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ का शुभारंभ
गुरुदेव श्री सुदेश जी शांडिल्य महाराज के सानिध्य में भोपाल के करुणाधाम आश्रम में त्रिदिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ शुरू हुआ। प्रथम दिवस पर देश, समाज...

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 23 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित करुणाधाम आश्रम में गुरुवार को त्रिदिवसीय सार्वभौम दिग्विजय महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। पीठाधीश्वर गुरुदेव श्री सुदेश जी शांडिल्य महाराज के पावन सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार और रीति-रिवाजों के साथ इस महायज्ञ का आरंभ हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य देश, समाज और विश्व के कल्याण की कामना करना है।
महायज्ञ के प्रथम दिवस पर देश की सुख-शांति, समृद्धि और उन्नति के लिए विशेष वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। यज्ञशाला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। विद्वान आचार्यों द्वारा पूरे विधि-विधान के साथ हवन कराया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कीं। उन्होंने राष्ट्र की उन्नति और जन-जन के कल्याण के लिए प्रार्थना की।
आध्यात्मिक चेतना और पर्यावरण कल्याण का संगम
इस पावन अवसर पर अपने आशीर्वचन में गुरुदेव श्री सुदेश जी शांडिल्य महाराज ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की एक अत्यंत महान और प्राचीन परंपरा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यज्ञ केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और मानव मात्र के कल्याण का एक सशक्त माध्यम है। गुरुदेव ने कहा कि वैदिक संस्कृति के संरक्षण और समाज में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने समझाया कि यज्ञ की प्रक्रिया में प्रकृति के तत्वों का सम्मान निहित है, जैसे घी, अनाज और जड़ी-बूटियों की आहुति से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि सामूहिक चेतना को भी उन्नत करने का कार्य करता है।
गुरुदेव ने आगे कहा कि वर्तमान परिदृश्य में जब पर्यावरण संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं, ऐसे यज्ञ अनुष्ठान हमें प्रकृति से जुड़ने और उसके प्रति जिम्मेदारी की भावना को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। यह परंपरा हमें सिखाती है कि कैसे हम प्रकृति का सम्मान करते हुए अपना कल्याण सुनिश्चित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यज्ञ के माध्यम से उत्पन्न होने वाली सकारात्मक ऊर्जा न केवल उपस्थित लोगों को बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड को प्रभावित करती है, जिससे शांति और सद्भाव का प्रसार होता है।
तीन दिवसीय आयोजन की रूपरेखा
करुणाधाम आश्रम प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह त्रिदिवसीय महायज्ञ आगामी तीन दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन, प्रवचनों और पूर्णाहुति के साथ चलेगा। आश्रम प्रबंधन ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे इस पुनीत अवसर का लाभ उठाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में पधारें और यज्ञ में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करें। इस महायज्ञ से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने और सभी के जीवन में सुख-समृद्धि आने की अपेक्षा है।
यज्ञ के अगले दिनों में विभिन्न देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना, मंत्र जप और महाआरती का भी विधान है। प्रतिदिन संध्याकालीन सत्र में देश-विदेश से पधारे संत-महात्माओं द्वारा प्रवचन दिए जाएंगे, जिनमें वे अपने ज्ञान और अनुभवों से श्रद्धालुओं को लाभान्वित करेंगे। आश्रम के सेवादारों द्वारा श्रद्धालुओं के अल्पाहार और अन्य व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि सभी भक्त सुगमता से यज्ञ में भाग ले सकें। इस महायज्ञ का समापन पूर्णाहुति के साथ होगा, जिसमें सभी आहुतियां समर्पित की जाएंगी और विश्व कल्याण की सामूहिक प्रार्थना की जाएगी।
