भोपाल: कलियासोत डैम के पास फिर दिखा बाघ, 25 किमी दायरे में आवाजाही
भोपाल में कलियासोत डैम के पास एक वयस्क बाघ के सड़क पार करने का वीडियो वायरल हुआ है। विशेषज्ञ इसे बाघों का प्राकृतिक कॉरिडोर मानते हैं, जो शहर के 25 किमी के दायरे में सक्रिय हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 23 जुलाई 2026
भोपाल शहर में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा है। कलियासोत डैम के पास रात के अंधेरे में एक वयस्क बाघ के सड़क पार करते हुए का वीडियो सामने आया है, जिससे क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता की चर्चा तेज हो गई है। राहगीरों द्वारा मोबाइल कैमरे में कैद किए गए इस दृश्य ने शहरवासियों के बीच बाघों के मूवमेंट को लेकर उत्सुकता और चिंता दोनों पैदा कर दी है।
सामने आए लगभग 12 मिनट के वीडियो में बाघ स्वस्थ और पूरी तरह वयस्क नजर आ रहा है। यह वीडियो करीब 5 से 6 दिन पुराना बताया जा रहा है, जो हाल ही में सार्वजनिक हुआ है। वीडियो में बाघ सड़क पार करते हुए दिखाई देता है, कुछ देर रुकता है और फिर धीरे-धीरे झाड़ियों में ओझल हो जाता है।
कलियासोत-केरवा क्षेत्र बाघों का प्राकृतिक आवास
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कलियासोत डैम, चंदनपुरा, केरवा और आसपास के जंगल बाघों के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक कॉरिडोर का हिस्सा हैं। वन्यजीव प्रेमी राशिद नूर के अनुसार, इन इलाकों में पहले से ही कई बाघ मौजूद हैं और वाल्मी की पहाड़ियों में भी उनकी गतिविधियां देखी जाती रही हैं। इसलिए, कलियासोत क्षेत्र में बाघ का दिखना किसी असामान्य घटना के बजाय उसकी प्राकृतिक गतिविधि का ही हिस्सा है।
भोपाल के आसपास 25 किमी क्षेत्र में बाघों का मूवमेंट
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भोपाल शहर के लगभग 25 किलोमीटर के परिधि क्षेत्र में बाघों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। कलियासोत और केरवा के जंगलों के अतिरिक्त, कोलार और बैरसिया जैसे इलाकों में भी बाघों को देखे जाने की सूचनाएं मिली हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में चूना भट्टी स्थित भोज विश्वविद्यालय परिसर में भी एक बाघ की मौजूदगी पाई गई थी, जो शहरी क्षेत्रों के करीब वन्यजीवों की बढ़ती निकटता को दर्शाता है।
लगभग 13 रेसिडेंशियल टाइगर सक्रिय
वन विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कलियासोत, केरवा, समरधा, अमोनी और भानपुर के वन क्षेत्रों में वर्तमान में लगभग 13 बाघों का एक स्थायी निवास (रेसिडेंशियल टाइगर) सक्रिय है। इनमें से कई बाघों का जन्म यहीं हुआ है और अब यह क्षेत्र उनका स्थायी ठिकाना बन चुका है। बाघिन टी-123 का परिवार भी इन्हीं इलाकों में विचरण करता पाया गया है।
शहरी विस्तार और वन्यजीवों का संरक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, भोपाल में जंगल और शहरी विस्तार के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। शहर के तेजी से बढ़ते विस्तार के कारण वन्यजीवों की गतिविधियां अब अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी हैं। यह स्थिति विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल देती है।
