भिंड में नेशनल लोक अदालत से 2200 से अधिक मामले निपटे, परिवारों को मिली खुशहाली
भिंड में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 869 लंबित और 1338 प्री-लिटिगेशन मामले सुलझाए गए। न्यायाधीशों ने पक्षकारों को सौहार्द और शांति का संदेश देते...

भिण्ड | संवाददाता: दीपेंद्र बोहरे
द क्लिफ न्यूज़ | भिण्ड | 12 सितंबर 2026
संपूर्ण भिण्ड जिले में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशों के अनुरूप नेशनल लोक अदालत का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के.एस. बारिया ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर कई गणमान्य न्यायिक अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, अभिभाषक संघ के पदाधिकारी, अधिवक्तागण और न्यायालयीन कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिन्होंने इस प्रयास की सफलता में योगदान दिया।
नेशनल लोक अदालत की सफलता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, जिला मुख्यालय भिण्ड के साथ-साथ मेहगांव, गोहद और लहार की तहसील न्यायालयों में कुल 27 न्यायिक खण्डपीठों का गठन किया गया था। इन खण्डपीठों में सुलहकर्ता सदस्यों के रूप में नामित अधिवक्ताओं ने अत्यंत सक्रियता से सहयोग प्रदान किया। इस सामूहिक और समन्वित प्रयास का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि न्यायालयों में लंबित कुल 869 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इन मामलों में दो करोड़ उनतीस लाख आठ हजार सात सौ छह रुपये के अवार्ड पारित किए गए, जिससे न्यायालयों पर न्यायिक बोझ कम हुआ।
इसके अतिरिक्त, लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के 1338 प्रकरणों का भी प्रभावशाली ढंग से निपटारा किया गया। इन प्री-लिटिगेशन मामलों में जलकर, संपत्ति कर, विद्युत, बीएसएनएल और विभिन्न बैंक संबंधी मामले शामिल थे। इन प्रकरणों के निपटारे के माध्यम से एक करोड़ उनतालीस लाख पांच हजार दो सौ इक्यासी रुपये की समझौता राशि प्राप्त हुई, जो पक्षकारों के लिए वित्तीय राहत का कारण बनी। कुल मिलाकर, इस लोक अदालत में 2207 से अधिक मामलों का समाधान निकाला गया।
न्यायिक खण्डपीठों द्वारा विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान
लोक अदालत की कार्यवाही के दौरान, केवल कानूनी विवादों का निपटारा ही नहीं हुआ, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के अनूठे और प्रेरणादायक उदाहरण भी देखने को मिले। विभिन्न खण्डपीठों ने पक्षकारों के बीच व्याप्त आपसी कटुता और वैमनस्य को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पुनः भावनात्मक स्तर पर जोड़ने का सार्थक प्रयास किया। इस प्रक्रिया के सफल समापन पर, न्यायाधीशों द्वारा सुलह के माध्यम से अपने विवादों का समाधान कराने वाले सभी पक्षकारों को शांति और समृद्धि के प्रतीक के रूप में पौधे भेंट किए गए। इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों को विवादों को समाप्त कर एक शांतिपूर्ण और समृद्ध जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
परिवारों को जोड़ने वाली मिसालें: वैवाहिक विवादों का सुखद अंत
विशेष रूप से, कुटुम्ब न्यायालय में भरण-पोषण से संबंधित दो महत्वपूर्ण प्रकरणों में सुलह की ऐसी मिसालें कायम हुईं, जिन्होंने समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। प्रथम घटना में, 76 वर्षीय पूनादेवी गुप्ता और उनके सेवानिवृत्त सैनिक पति राधेश्याम गुप्ता के बीच लंबे समय से चला आ रहा वैवाहिक विवाद, लोक अदालत के हस्तक्षेप से सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझ गया। वहीं, दूसरी घटना में, पूनम और उनके पति रामनिवास के बीच 12 वर्ष पुराने वैवाहिक विवाद का भी सफलतापूर्वक पटाक्षेप हुआ।
इन दोनों ही संवेदनशील मामलों में, प्रधान न्यायाधीश दिलीप कुमार गुप्ता ने अपनी सूझबूझ और मध्यस्थता से पति-पत्नी को पुनः एक साथ रहने के लिए राजी किया। एक अत्यंत सौहार्दपूर्ण और गरिमामय वातावरण में, दोनों जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर अपने संबंधों की एक नई और सुखद शुरुआत की। दोनों ही जोड़ों ने न्यायाधीशों द्वारा उपहार में मिले पौधों को अपने घर में ससम्मान लगाने का संकल्प लिया और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान आपसी बातचीत और समझदारी से करने की शपथ ली। नेशनल लोक अदालत के इस आयोजन ने न केवल न्यायालयों पर से मामलों का दबाव कम किया, बल्कि कई बिखरते परिवारों को फिर से एक करके उन्हें खुशहाली और अमन-चैन के मार्ग पर अग्रसर किया है।
