भिंड में हिंदी दिवस पर प्रश्नोत्तरी, विद्यार्थियों ने दिखाया ज्ञान
भिंड के सरस्वती विद्या विहार स्कूल में सक्षम युवा मंडल द्वारा हिंदी दिवस पर आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

भिण्ड | संवाददाता: दीपेंद्र बोहरे
द क्लिफ न्यूज़ | 15 सितंबर 2026
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार और माय भारत केंद्र भिंड के निर्देशन में सक्षम युवा मंडल मुरलीपुरा द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सरस्वती विद्या विहार स्कूल टीकरी में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हिंदी ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही, जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मातृभाषा के प्रति अपनी गहरी रुचि प्रदर्शित की।
कार्यक्रम में सरस्वती विद्या विहार स्कूल के प्राचार्य शिवम त्रिपाठी, सक्षम युवा मंडल के अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह परमार, शिक्षक दिनेश कुमार और जनवेद बरुआ सहित शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में दैनिक जीवन में हिंदी भाषा के महत्व और भारतीय संस्कृति में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी राष्ट्रभाषा पर गर्व करने और इसके निरंतर प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
प्रश्नोत्तरी में मेधावियों का सम्मान
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए रागिनी भदौरिया ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, जीतू भदौरिया दूसरे और अनामिका तीसरे स्थान पर रहीं। सभी विजयी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और ट्रॉफी प्रदान कर अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।
विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग क्विज हेतु प्रेरणा
मंडल अध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह परमार ने उपस्थित विद्यार्थियों को विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग क्विज में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि यह क्विज प्रतियोगिता माननीय प्रधानमंत्री से मुलाकात करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। इस प्रक्रिया में निबंध और पीपीटी प्रदर्शन जैसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को यह विशिष्ट अवसर मिल सकता है।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रभाषा के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए आयोजकों और शिक्षकों का धन्यवाद किया गया। यह आयोजन विद्यार्थियों के बीच हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में एक सार्थक पहल साबित हुई, जिसने उनमें राष्ट्रभाषा के प्रति प्रेम और गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।
