भिंड: महिला न्यायाधीशों को धमकाने के आरोप में अभिभाषक संघ अध्यक्ष सहित दो पर FIR
भिंड में महिला न्यायाधीशों के साथ अभद्रता और धमकाने के आरोप में जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष विनीत मिश्रा और अधिवक्ता सौरभ मिश्रा के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | 6 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में महिला न्यायाधीशों के साथ कथित तौर पर रास्ता रोकने, गाली-गलौज करने और धमकाने के आरोप में जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष विनीत मिश्रा और एक अन्य अधिवक्ता सौरभ मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से प्राप्त न्यायिक अधिकारियों की शिकायत के बाद की गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, देहात थाना पुलिस को 30 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के माध्यम से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश भिंड का एक पत्र प्राप्त हुआ था। इस पत्र के साथ प्रथम व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ खण्ड) निधि नीलेश श्रीवास्तव और व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड) मुनमुन सिंह शर्मा की शिकायतें भी संलग्न थीं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि 28 जुलाई को विनीत मिश्रा और सौरभ मिश्रा ने मिलकर उनका रास्ता रोका और अनुचित व्यवहार किया।
न्यायिक अधिकारियों द्वारा शिकायत और कार्रवाई की प्रक्रिया
शिकायत में विस्तृत जानकारी देते हुए दोनों महिला न्यायिक अधिकारियों ने बताया कि उक्त अधिवक्ताओं ने न केवल उनका रास्ता रोका, बल्कि उनके साथ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया और उन्हें धमकी भी दी। इस घटना के बाद, दोनों न्यायाधीशों ने अलग-अलग पत्रों के माध्यम से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अवगत कराया और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की थी।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने प्राप्त शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए उन्हें आवश्यक कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के उपरांत, देहात थाना पुलिस ने दोनों शिकायतों और उपलब्ध प्रारंभिक तथ्यों की जांच की। प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया अपराध पाए जाने पर, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2) और 296(बी) के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया।
आगे की जांच और वैधानिक कार्यवाही
देहात थाना पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना वर्तमान में जारी है। पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान सभी उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा और पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इन सभी के आधार पर ही आगे की वैधानिक कार्यवाही तय की जाएगी। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि निष्पक्ष जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे।
