भिंड: किशोरी की संदिग्ध मौत, डॉक्टर की लापरवाही पर क्लिनिक सील
भिण्ड के श्रीधाम क्लिनिक में 17 वर्षीय जान्हवी तोमर की संदिग्ध मौत के बाद प्रशासन की कार्रवाई। जांच रिपोर्ट में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की...

भिण्ड | संवाददाता: दीपेंद्र बोहरे
द क्लिफ न्यूज़ | भिण्ड | 10 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के भिण्ड शहर में एक 17 वर्षीय किशोरी, जान्हवी तोमर, की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने स्थानीय प्रशासन को सख्त कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है। श्रीधाम क्लिनिक में उपचार के दौरान हुई इस घटना के बाद, क्लिनिक को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है और मामले की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर एक एमडी डॉक्टर और दो स्टाफ नर्सों के विरुद्ध गंभीर लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की गई है।
यह घटना तब सामने आई जब नुन्हाटा निवासी जान्हवी तोमर को तेज बुखार और पेट दर्द की शिकायत के बाद पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का गंभीर आरोप है कि जिला अस्पताल में तैनात एमडी मेडिसिन डॉ. विनीत गुप्ता ने नियमों को ताक पर रखते हुए, अस्पताल में भर्ती मरीज को अपने निजी श्रीधाम क्लिनिक में बुलाया और वहां महंगी जांचें कराने के लिए कहा। सोमवार रात किशोरी की तबीयत बिगड़ने पर, मंगलवार सुबह जब परिजन उसे डॉक्टर के क्लिनिक ले गए, तो डॉक्टर के अनुपस्थित होने के कारण लगभग एक घंटे तक उसे आवश्यक उपचार नहीं मिल सका, जिसके परिणामस्वरूप क्लिनिक में ही उसकी मौत हो गई।
जांच रिपोर्ट में गंभीर खामियां उजागर
इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने क्लिनिक परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एसडीएम अखिलेश शर्मा और सीएसपी निरंजन राजपूत को भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचना पड़ा। प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए श्रीधाम क्लिनिक को सील कर दिया, जबकि आरोपी चिकित्सक डॉ. विनीत गुप्ता मौके से फरार होने में सफल रहे। कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एक समिति का गठन किया था, जिसमें तहसीलदार गुप्ता, डॉ. डी.के. शर्मा और आरएमओ डॉ. निखिल अग्रवाल को शामिल किया गया था।
बुधवार को जांच समिति द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट ने कई गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही को उजागर किया। रिपोर्ट में यह पाया गया कि जिला अस्पताल में भर्ती मरीज को सरकारी नियमों के विरुद्ध निजी क्लिनिक में बुलाना, इलाज में घोर लापरवाही बरतना और निजी स्वार्थ के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी करना, डॉक्टर की प्रमुख दोषी कृत्य थे। इसके अतिरिक्त, अस्पताल में तैनात दो नियमित स्टाफ नर्सों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, ये नर्सें भर्ती मरीज को निजी क्लिनिक ले जाने और वहां से बाहर से जांच कराने जैसी गतिविधियों को रोकने में पूर्णतः विफल रहीं।
निलंबन और कार्रवाई का प्रस्ताव
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आर.के. मिश्रा ने बताया कि जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर, कलेक्टर के निर्देशानुसार कठोर कदम उठाए गए हैं। ड्यूटी में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में दोनों नियमित स्टाफ नर्सों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, आरोपी चिकित्सक डॉ. विनीत गुप्ता के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उन्हें निलंबित करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के निदेशक और स्वास्थ्य विभाग, भोपाल को भेज दिया गया है।
प्रशासन द्वारा की गई इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। पीड़ित किशोरी के परिजनों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर उचित और त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल जाती, तो जान्हवी की जान बचाई जा सकती थी। प्रशासन ने इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंप दी है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में निजी प्रैक्टिस के बढ़ते अनैतिक प्रभाव पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं, जो कि चिंता का विषय है। स्थानीय प्रशासन अब इस मामले में कानूनी पहलुओं की गहन समीक्षा कर रहा है ताकि दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों को उचित दंड सुनिश्चित किया जा सके।
