भिंड: खाद्य सुरक्षा विभाग में 'सैंपलिंग' के बहाने वसूली का खेल उजागर
भिंड खाद्य सुरक्षा विभाग पर सैंपलिंग के बहाने वसूली का आरोप। सूत्रों के अनुसार, दिन में जांच के नाम पर मिलावटखोरों पर दबाव बनाकर शाम को अधिकारियों के घर 'सेटिंग' की जाती है।

संवाददाता: दीपेन्द्र बोहरे
द क्लिफ न्यूज़ | 4 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग की अधिकारी किरण सेंगर और रेखा सोनी के नेतृत्व में बाजारों में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग के नाम पर एक अनूठा 'वसूली का खेल' खेला जा रहा है। दिन में दुकानों पर खाद्य पदार्थों की जांच का दिखावा कर आम जनता की सेहत की सुरक्षा का ढोंग रचा जाता है, जबकि असली खेल शाम को शुरू होता है।
विभाग की ओर से बाजारों में मोबाइल फूड लैब और क्विक किट के साथ निरीक्षण का आयोजन किया जाता है। इस दौरान मिठाइयों, दूध, दही और पनीर जैसे खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे जाते हैं। मीडिया में भी इन छापों को प्रमुखता से प्रकाशित करवाकर विभाग अपनी पीठ थपथपाता है। दुकानदारों में डर का माहौल बनाया जाता है, ताकि वे विभाग की 'मांग' पूरी करने के लिए मजबूर हो जाएं।
'कार्रवाई' का असली चेहरा: शाम को होती है 'सेटिंग'
सूत्रों का दावा है कि दिनभर की इन कार्रवाइयों का मुख्य उद्देश्य आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि मिलावटखोर दुकानदारों पर दबाव बनाना और उनसे धन उगाही करना है। शाम ढलते ही कार्रवाई का असली और काला सच सामने आता है। जिन दुकानों पर दिन में कार्रवाई की गई होती है, शाम को उन्हीं दुकानदारों की कतार अधिकारियों के आवास पर लगती है।
दावों के अनुसार, इन मुलाकातों के दौरान यह तय किया जाता है कि किस सैंपल को प्रयोगशाला में 'पास' कराना है, किस सैंपल की रिपोर्ट को दबाना है और किन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस प्रकार, विभाग की ओर से की जाने वाली 'कार्रवाई' केवल एक दिखावा बनकर रह जाती है, जिसका अंतिम लक्ष्य अपनी जेबें गर्म करना होता है। यह गोरखधंधा खाद्य सुरक्षा के मूल उद्देश्य को धूमिल कर रहा है और मिलावटखोरों को बढ़ावा दे रहा है।
