भिंड आरटीओ चेकपोस्ट पर अवैध वसूली का आरोप, निजी कटरों की भूमिका पर उठे सवाल
भिंड जिले की आरटीओ चेकपोस्ट पर वाहन चालकों ने कागजात दुरुस्त होने के बावजूद अवैध वसूली का आरोप लगाया है। चालकों का दावा है कि निजी व्यक्ति नकद राशि की मांग करते हैं।

संवाददाता: दीपेंद्र बोहरे
द क्लिफ न्यूज़ | भिण्ड | 17 अगस्त 2026
भिंड जिले की सीमा पर स्थित आरटीओ चेकपोस्ट पर वाहन चालकों से कथित तौर पर अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। भारी और व्यावसायिक वाहनों के चालकों का दावा है कि उनके कागजात पूरी तरह दुरुस्त होने के बावजूद उनसे नकद राशि मांगी जा रही है। चालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि राशि का भुगतान न करने पर उन्हें परेशान किया जाता है और कभी-कभी बदसलूकी का भी सामना करना पड़ता है।
आरोप है कि चेकपोस्ट के आसपास कुछ निजी व्यक्ति सक्रिय हैं जो वाहनों को रोककर 'एंट्री फीस' के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं। वाहन चालकों के अनुसार, इस अवैध वसूली के बदले में उन्हें कोई भी आधिकारिक रसीद नहीं दी जाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं हो रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
निजी व्यक्तियों की सक्रियता और मिलीभगत की आशंका
स्थानीय वाहन चालकों और व्यापारियों ने चिंता व्यक्त की है कि चेकपोस्ट पर निजी व्यक्तियों की मौजूदगी बनी हुई है और वे वाहनों के आवागमन में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं। कुछ लोगों ने इन आरोपों के पीछे आरटीओ विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस संबंध में किसी भी अधिकारी की संलिप्तता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
इस मामले में आरटीओ अधिकारी पप्पू भदोरिया का नाम भी आरोपों के संदर्भ में सामने आया है। उन पर कथित तौर पर अवैध वसूली को संरक्षण देने या इसमें मिलीभगत करने के आरोप लगाए गए हैं। खबर लिखे जाने तक संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
वाहन चालकों का कहना है कि यदि चेकपोस्ट पर किसी भी प्रकार की अनधिकृत राशि वसूली जा रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे न केवल वाहन चालकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी होती है, बल्कि सरकारी शुल्क के नाम पर बिना रसीद रकम वसूलने से सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान की आशंका है।
इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निजी व्यक्तियों द्वारा वाहनों को रोककर वसूली की जा रही है, तो उनकी यह सक्रियता किसके निर्देश पर हो रही है। यदि आरोप निराधार हैं, तो परिवहन विभाग को भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर वाहन चालकों की शिकायतों का समाधान करना चाहिए।
वाहन चालकों और स्थानीय व्यापारियों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेकपोस्ट पर लगे सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा करने और अनधिकृत वसूली से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया है। उम्मीद है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि अनियमितता पाई जाती है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
