भारत-उज़्बेकिस्तान ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर ज़ोर दिया
नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, रक्षा, और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 4 अगस्त 2026
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव के बीच नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक साझेदारी की गहन समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य एजेंडा व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, रक्षा, शिक्षा, संस्कृति और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और सुदृढ़ बनाना था।
विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने इस बैठक के उपरांत 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर अपने उज़्बेक समकक्ष के साथ मुलाकात को 'बहुत अच्छा' बताया। उन्होंने साझा की गई जानकारी में कहा, "हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया। हमने क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर भी चर्चा की और अपने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।"
'विस्तारित पड़ोस' का अभिन्न अंग उज़्बेकिस्तान
अपने प्रारंभिक वक्तव्य में डॉ. जयशंकर ने भारत की विदेश नीति में उज़्बेकिस्तान के विशिष्ट स्थान को रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत उज़्बेकिस्तान को अपने 'विस्तारित पड़ोस' का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा मानता है। विदेश मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध आधुनिक काल में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी की नींव बने हैं।
डॉ. जयशंकर ने भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच नीतिगत समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही विकासशील राष्ट्र हैं, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण काफी हद तक समान है। उन्होंने विशेष रूप से सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा किया। जयशंकर ने कहा, "जब आतंकवाद, चरमपंथ (कट्टरवाद) और नशीली दवाओं की अवैध तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों की बात आती है, तो भारत और उज़्बेकिस्तान दोनों एक जैसा रुख साझा करते हैं।" इन खतरों से निपटने के लिए दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों में सहयोग पर जोर
दोनों देशों के नेताओं ने आपसी द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा की, जो वर्तमान में लगभग 1 अरब डॉलर के स्तर पर है। दोनों पक्षों ने इस व्यापारिक आंकड़े को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस बार की वार्ताओं में एक नया आयाम जोड़ते हुए, पारंपरिक क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और डिजिटल तकनीक के साथ-साथ 'रेयर अर्थ मिनरल्स' (दुर्लभ पृथ्वी खनिज) और खनन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष रणनीतिक चर्चा हुई। यह सहयोग दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंधों को गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
