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भारत-सिंगापुर सहयोग: सेमीकंडक्टर, डिजिटलीकरण और हरित अर्थव्यवस्था पर जोर

नई दिल्ली और सिंगापुर के बीच उच्च-स्तरीय बैठक में सेमीकंडक्टर, डिजिटलीकरण, हरित अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

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भारत-सिंगापुर सहयोग: सेमीकंडक्टर, डिजिटलीकरण और हरित अर्थव्यवस्था पर जोर

द क्लिफ न्यूज़ | 21 अगस्त 2026

भारत और सिंगापुर ने रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करते हुए सेमीकंडक्टर, डिजिटलीकरण और हरित अर्थव्यवस्था जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। यह निर्णय सिंगापुर में आयोजित 'भारत-सिंगापुर मिनिस्टीरियल राउंडटेबल' (आईएसएमआर) के चौथे संस्करण में लिया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य के सहयोग के नए आयामों पर चर्चा की।

केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। सिंगापुर की ओर से उप-प्रधानमंत्री गन किम योंग, विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालकृष्णन और गृह मंत्री के. शनमुगम ने वार्ता में भाग लिया। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मंत्रियों ने एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, कनेक्टिविटी, डिजिटलाइजेशन, हेल्थकेयर और मेडिसिन, स्किल्स डेवलपमेंट और सस्टेनेबिलिटी जैसे छह मुख्य स्तंभों के तहत 'इंडिया-सिंगापुर कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' (सीएसपी) की प्रगति का जायजा लिया।

सहयोग के नए क्षेत्रों पर मंथन

द्विपक्षीय सहयोग में निरंतर वृद्धि को देखते हुए, मंत्रियों ने हरित अर्थव्यवस्था, औद्योगिक पार्कों की स्थापना, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक, सेमीकंडक्टर और ग्रीन शिपिंग जैसे नए और उभरते क्षेत्रों में पहलों पर विचार-विमर्श किया। इन क्षेत्रों को सहयोग को और गहरा करने की महत्वपूर्ण क्षमता वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है। मंत्रियों ने आईएसएमआर के तहत हुई प्रगति पर भी संतोष व्यक्त किया, जिसमें यूपीआई-पेनाऊ कनेक्ट ट्रांजैक्शन में उल्लेखनीय वृद्धि, सिंगापुर में भारतीय जेनेरिक दवाओं के पंजीकरण के लिए एक पायलट का कार्यान्वयन, और भारत से सिंगापुर को लीची, आम, चेरी और प्लम जैसे फलों का निर्यात शामिल है।

इसके अतिरिक्त, सिंगापुर फूड एजेंसी द्वारा सिंगापुर को प्रोसेस्ड पोल्ट्री उत्पादों के निर्यात के लिए भारतीय प्रतिष्ठानों को मंजूरी देना और चेन्नई में कौशल विकास के लिए नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का विकास भी प्रगति के प्रमुख संकेतक रहे।

खाद्य सुरक्षा और समुद्री विरासत में समझौते

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और सिंगापुर फूड एजेंसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित हुआ। यह एमओयू कृषि और खाद्य उत्पादों के आपसी व्यापार को सुगम बनाने में मदद करेगा। इसी प्रकार, समुद्री विरासत के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय तथा सिंगापुर के संस्कृति, समुदाय और युवा मंत्रालय के बीच भी एक एमओयू हुआ। यह समझौता समुद्री विरासत के क्षेत्र में एक मजबूत ढांचा प्रदान करेगा।

मंत्रियों की अलग से बैठकें

इस उच्च-स्तरीय बैठक के इतर, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सिंगापुर के गृह मंत्री के. शनमुगम और अपने समकक्ष डॉ. विवियन बालकृष्णन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन मुलाकातों में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने डॉ. बालकृष्णन के साथ मिलकर सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के नए चांसरी सह आवासीय भवन परिसर का शिलान्यास भी किया, जो दोनों देशों के बीच स्थायी संबंधों का प्रतीक है।