भारत-रूस: जयशंकर की मॉस्को यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन और विदेश मंत्री लावरोव से मुलाकात की। द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और असंतुलन दूर करने पर जोर दिया गया।

संवाददाता: शाश्वत तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | मॉस्को | 25 अगस्त 2026
वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, भारत और रूस ने अपने 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक संबंधों' को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में रूस की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुँचे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। यह यात्रा आगामी द्विपक्षीय वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले हुई है और इसने दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तालमेल को एक नया रोडमैप प्रदान किया है।
मॉस्को स्थित क्रेमलिन में राष्ट्रपति पुतिन के साथ अपनी विशेष मुलाकात के दौरान, डॉ. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश और शुभकामनाएं सौंपीं। उन्होंने द्विपक्षीय आर्थिक प्रगति के प्रमुख आंकड़ों को भी रेखांकित किया, जिस पर राष्ट्रपति पुतिन ने दोनों देशों के संबंधों की निरंतरता और मज़बूती की सराहना की। इस मुलाकात में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई, जो दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और साझा हितों को दर्शाती है।
आर्थिक सहयोग और व्यापारिक लक्ष्य
भारतीय विदेश मंत्री ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। इस वार्ता का मुख्य केंद्र बिंदु यूरेशियाई सुरक्षा और विभिन्न वैश्विक प्राथमिकताओं पर आपसी समन्वय बढ़ाना रहा। दोनों देशों ने यह सहमति व्यक्त की कि जटिल अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद, भारत-रूस सहयोग निरंतर गहराता गया है। विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-रूस साझेदारी ने लगातार मज़बूती और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की अद्भुत क्षमता दिखाई है।
डॉ. जयशंकर ने रूस के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक में भी भाग लिया। इस बैठक के बाद, उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा किया कि व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर अंतर-सरकारी आयोग की यह बैठक अत्यंत सफल रही। बातचीत में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और मोबिलिटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों पक्षों ने सेक्टर-विशिष्ट लक्ष्यों को प्राथमिकता देने और समस्याओं के समाधान में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए कार्यान्वयन और परिणामों पर विशेष बल दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्ष उद्योग की प्राथमिकताओं के साथ संस्थागत तंत्र को जोड़कर, व्यावहारिक बाधाओं की पहचान कर और नीतिगत प्रतिक्रिया में सुधार करके व्यवसायों के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने के मुद्दों पर भी सहमत हुए। यह दर्शाता है कि दोनों देश केवल उच्च-स्तरीय वार्ता तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं को हल करने और व्यापारिक संबंधों को सुगम बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।
व्यापार असंतुलन और भविष्य की योजनाएं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आंकड़ों के साथ बताया कि पिछले पांच वर्षों में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार चार गुना से अधिक बढ़ा है। यह 2021-22 में लगभग 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में लगभग 60 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। यह आर्थिक साझेदारी की अपार संभावनाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। हालांकि, इस तीव्र व्यापार विस्तार के साथ-साथ व्यापार असंतुलन में भी काफी वृद्धि हुई है, जो लगभग 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। डॉ. जयशंकर ने इसे दूर करने को वर्तमान में सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बताया।
इस असंतुलन को दूर करने और 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, विदेश मंत्री ने बाजार तक पहुंच, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने, भुगतान तंत्र को मजबूत करने और बिज़नेस-टू-बिज़नेस संबंधों को और मज़बूत करने जैसे महत्वपूर्ण कदमों पर जोर दिया। इन उपायों से न केवल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध अधिक संतुलित और टिकाऊ हों। भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी, विशेषकर ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में, वैश्विक मंच पर उनके महत्व को बढ़ाती है। मॉस्को में हुई यह यात्रा इन संबंधों को नई ऊर्जा देने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करने में सहायक सिद्ध हुई है।
