भारत पड़ोसियों से डिजिटल भुगतान और ढांचागत सहयोग मजबूत कर रहा
भारत अपनी 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका सहित सात देशों के साथ डिजिटल भुगतान, ढांचागत विकास और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ा रहा है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 4 अगस्त 2026
भारत सरकार अपनी 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत सीमावर्ती देशों के साथ व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा के मोर्चे पर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है। विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने लोकसभा में सांसद यूसुफ पठान द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में बताया कि भारत ने अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ एक गतिशील और परिणाम-उन्मुख कूटनीतिक रोडमैप अपनाया है, जिसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति देना और सुरक्षा चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करना है।
मंत्रालय के अनुसार, भारत अब पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान, अफगानिस्तान और मालदीव के साथ केवल पारंपरिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल और वित्तीय कनेक्टिविटी के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। इस नीति के तहत, भारत ने इन देशों के साथ डिजिटल भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए नए समझौते किए हैं, जिससे सीमा पार व्यापार और पर्यटन को काफी सुगम बनाया जा सका है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा को बढ़ावा
सरकार पड़ोसियों में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) के निर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने और अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा सहयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। यह कदम भारत की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए इन देशों में डिजिटल परिवर्तन को गति देने में सहायक होगा।
ऊर्जा और परिवहन कनेक्टिविटी का विस्तार
नई पहलों के दायरे को बढ़ाते हुए, भारत न केवल परिवहन मार्गों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, बल्कि ऊर्जा साझेदारी के तहत सीमा पार बिजली ग्रिड और पेट्रोलियम पाइपलाइनों का नेटवर्क भी बिछा रहा है। पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ, इन समझौतों में अब जलवायु सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, मानव सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे आधुनिक सुरक्षा क्षेत्रों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है।
व्यापार सुगमता और रणनीतिक साझेदारी
सीमा पार व्यापार को निर्बाध बनाने के उद्देश्य से इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) का आधुनिकीकरण किया गया है। इसके अतिरिक्त, रेलवे कूटनीति के माध्यम से यात्रियों और माल ढुलाई की कनेक्टिविटी को नए स्तर पर ले जाया जा रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में यह बहुपक्षीय सहयोग न केवल भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखेगा, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत को एक विश्वसनीय और जिम्मेदार रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करेगा।
