भारत ने यूएनएससी में सुधारों की मांग की: 'ग्लोबल साउथ' को मिले प्रतिनिधित्व
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग की। राजदूत योजना पटेल ने कहा कि 'ग्लोबल साउथ' को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने से सभी का भविष्य सुरक्षित होगा।

संवाददाता: शाश्वत तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | न्यूयॉर्क | 20 अगस्त 2026
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की कार्यप्रणाली में तत्काल और गहरे सुधारों की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की चार्ज डी अफेयर राजदूत योजना पटेल ने यूएनएससी के कामकाज के तरीकों पर आयोजित एक सालाना खुली बहस में कहा कि 'ग्लोबल साउथ' को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में सभी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने रेखांकित किया कि 1945 के बाद से दुनिया में आमूल-चूल परिवर्तन आया है और आज की असाधारण सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए इस वैश्विक संस्था का पुनर्गठन अनिवार्य हो गया है।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, राजदूत योजना पटेल ने सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर उठ रहे गंभीर सवालों को उजागर किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी दुनिया आज की वास्तविकता से बिल्कुल भिन्न है। तब से संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता चार गुना बढ़ चुकी है। 80 साल पहले हुए एक वैश्विक संघर्ष के परिणाम को वर्तमान वैश्विक संस्था की संरचना, गतिशीलता और कार्यप्रणाली का निर्धारक नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इसमें परिवर्तन की आवश्यकता है और यह यथाशीघ्र होना चाहिए।
सुरक्षा परिषद में सुधारों की मुख्य मांगें
राजदूत पटेल ने सुरक्षा परिषद में सुधारों पर भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत दोनों श्रेणियों में बढ़ोतरी चाहता है, विशेष रूप से 'ग्लोबल साउथ' के देशों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह केवल लिखित चर्चाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसमें स्पष्ट रूप से परिभाषित मील के पत्थर और समय-सीमाएं तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के कार्यप्रणाली में सुधार पर चर्चा को केवल एक अलग मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे यूएनएससी सुधारों के व्यापक एजेंडे का एक अभिन्न अंग माना जाना चाहिए। यह सदस्य देशों की श्रेणियों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और वीटो जैसे अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ा हुआ है। परिषद में किसी भी सुधार प्रस्ताव में इन सभी पहलुओं का समग्र रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि यह अधिक व्यापक, वास्तविक और प्रभावी बन सके।
पारदर्शिता और समान अधिकार की वकालत
भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि गैर-स्थायी सदस्यों को उनके दो साल के कार्यकाल के दौरान प्रभावी ढंग से योगदान देने में सक्षम बनाने के लिए, सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों को दस्तावेजों तक पहुंच के मामले में समान विशेषाधिकार प्राप्त होने चाहिए। भारतीय राजनयिक ने सुरक्षा परिषद की प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने 'लिस्टिंग' और 'डी-लिस्टिंग' जैसी प्रक्रियाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को केवल संकीर्ण राजनीतिक हितों को साधने वाले मंच के रूप में काम नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक निष्पक्ष संस्था के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
