BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
National

भारत ने अमेरिका से 100 जेवलिन मिसाइलें खरीदीं, सेना की एंटी-टैंक क्षमता बढ़ी

भारतीय सेना ने अमेरिकी सरकार के साथ 100 जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए समझौता किया है। यह खरीद सेना की तत्काल एंटी-आर्मर जरूरतों को पूरा करेगी।

Few hours ago
5 मिनट में पढ़ें
भारत ने अमेरिका से 100 जेवलिन मिसाइलें खरीदीं, सेना की एंटी-टैंक क्षमता बढ़ी

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 29 अगस्त 2026

भारतीय सेना ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए अमेरिकी निर्मित जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 28 अगस्त 2026 को भारतीय सेना और अमेरिकी सरकार के बीच लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर हस्ताक्षर किए गए। यह खरीद अमेरिकी फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रक्रिया के तहत की जाएगी, जिसका उद्देश्य भारत की तत्काल एंटी-आर्मर जरूरतों को पूरा करना है।

अमेरिकी रक्षा बिक्री संबंधी अधिसूचना के अनुसार, इस सौदे में भारत के लिए 100 FGM-148 जेवलिन राउंड, एक परीक्षण मिसाइल और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट (LwCLU) अथवा जेवलिन ब्लॉक 1 कमांड लॉन्च यूनिट की खरीद शामिल है। इस प्रस्तावित पैकेज की अनुमानित लागत 45.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 4.57 करोड़ डॉलर) है। यह खरीद 'आपात खरीद' (Emergency Procurement) के माध्यम से की जा रही है, ताकि मिसाइलों की आपूर्ति तेजी से हो सके और सेना की टैंक रोधी क्षमता को तत्काल मजबूती मिले।

जेवलिन मिसाइल: आधुनिक युद्धक क्षमता का प्रतीक

जेवलिन एक अत्यंत उन्नत, मैन-पोर्टेबल, मीडियम-रेंज, फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक हथियार प्रणाली है। इसे विशेष रूप से टैंकों और अन्य बख्तरबंद वाहनों को सटीकता से निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि एक बार ऑपरेटर द्वारा लक्ष्य लॉक कर दिए जाने के बाद, मिसाइल स्वयं लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इससे मिसाइल लॉन्च करने के बाद सैनिक को तुरंत कवर लेने या अपनी स्थिति बदलने का अवसर मिल जाता है, जिससे उसकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

इस प्रणाली को RTX और लॉकहीड मार्टिन के संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित किया गया है। यह न केवल अमेरिकी सेना और मरीन कॉर्प्स का हिस्सा है, बल्कि दुनिया भर के कई मित्र देशों की सेनाएं भी इसका सफलतापूर्वक उपयोग कर रही हैं। हाल ही में यूक्रेन युद्ध में भी जेवलिन प्रणाली के व्यापक उपयोग ने युद्ध की परिस्थितियों में इसकी मारक क्षमता और प्रभावशीलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया है।

सेना की सामरिक शक्ति में वृद्धि

भारतीय सेना के लिए जेवलिन की खरीद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी एंटी-आर्मर क्षमता में होने वाली वृद्धि है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में, टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन अभी भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में, पैदल सैनिकों के पास एक हल्की, पोर्टेबल और अत्यधिक सटीक टैंक रोधी प्रणाली का होना उनकी सामरिक क्षमता को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाता है। जेवलिन को इस प्रकार से डिज़ाइन किया गया है कि इसे एक छोटी सी टीम द्वारा भी प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है। यह दुर्गम इलाकों और अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों को बख्तरबंद खतरों का सामना करने के लिए एक अतिरिक्त और शक्तिशाली विकल्प प्रदान करता है।

भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का विस्तार

यह मिसाइल सौदा केवल हथियारों की खरीद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा औद्योगिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी दूतावास के अनुसार, यह समझौता भविष्य में भारत और अमेरिका की रक्षा कंपनियों के बीच सहयोग और संयुक्त उत्पादन के नए रास्ते खोल सकता है। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि इससे भविष्य में न केवल तैयार हथियार खरीदने का अवसर मिलेगा, बल्कि उनके उत्पादन, रखरखाव और तकनीकी सहयोग में भी भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़ सकती है।

'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने की संभावना

भारत सरकार रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर लगातार जोर दे रही है, और 'मेक इन इंडिया' पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि जेवलिन सौदे के तहत संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर बातचीत आगे बढ़ती है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए नई प्रौद्योगिकियों और उन्नत विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करने का एक बड़ा अवसर प्रदान कर सकता है। अमेरिकी पक्ष ने भी भविष्य में सह-उत्पादन और दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने की दिशा में सहयोग की इच्छा व्यक्त की है।

दीर्घकालीन चर्चा का परिणाम

जेवलिन प्रणाली की खरीद भारत के लिए कोई नई चर्चा नहीं है। भारतीय सेना के लिए इस प्रणाली की खरीद पर पिछले कई वर्षों से विचार-विमर्श चल रहा था। नवंबर 2025 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को जेवलिन सिस्टम और संबंधित उपकरणों की संभावित बिक्री के लिए 45.7 मिलियन डॉलर के अनुमानित पैकेज को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसी क्रम में, अब वास्तविक खरीद समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जो सेना की मौजूदा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक ठोस पहल है।

सीमा सुरक्षा के लिए सामरिक महत्व

भारत की जटिल सुरक्षा परिस्थतियों, विशेषकर लंबी सीमाओं पर बख्तरबंद खतरों से निपटने के लिए, आधुनिक एंटी-टैंक हथियारों की आवश्यकता लगातार बनी हुई है। जेवलिन की खरीद भारतीय सेना के मौजूदा एंटी-टैंक हथियारों के शस्त्रागार को एक महत्वपूर्ण पूरक क्षमता प्रदान करेगी। हालांकि, यह खरीद अकेले सेना की संपूर्ण एंटी-टैंक जरूरतों को पूरा नहीं करेगी; इसे भारतीय सेना के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

सौदे के बहुआयामी लाभ

जेवलिन की खरीद से भारतीय सेना को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे पहले, यह तत्काल एंटी-टैंक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। दूसरे, यह अमेरिका के साथ रक्षा तकनीकी सहयोग के दायरे का विस्तार करेगा। और तीसरे, यह भविष्य में संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं के द्वार खोलेगा, जो भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। भारत लगातार अपने सैन्य उपकरणों को आधुनिक बनाने और विभिन्न स्रोतों से महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताएं हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है, और जेवलिन सौदा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस कदम है।