भारत ने 11 देशों से की अहम खनिजों की आपूर्ति हेतु साझेदारी
भारत भविष्य की प्रौद्योगिकियों, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा में आत्मनिर्भरता के लिए अहम खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रहा है। इसने 11 देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते किए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 31 जुलाई 2026
भारत ने भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अहम खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस पहल के तहत, भारत ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और जापान सहित 11 प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय साझेदारी और सहयोग समझौते किए हैं। यह जानकारी विदेश राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने संसद में एक लिखित उत्तर के माध्यम से साझा की।
यह कदम राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह द्वारा क्लीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस प्रोडक्शन के लिए आवश्यक अहम खनिजों तक भारत की पहुंच सुनिश्चित करने संबंधी पूछे गए प्रश्न के जवाब में उठाया गया है। विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने स्पष्ट किया कि भारत इन खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को बेहतर बनाने के लिए सहयोगी देशों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय पहलों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहा है। इसमें रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी में सहयोग, उच्च गुणवत्ता वाले खनिजों तक दीर्घकालिक पहुंच सुनिश्चित करना, तथा टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देना शामिल है। भारत अहम खनिजों की मूल्य श्रृंखला में अनुसंधान, विकास और निवेश को बढ़ाने वाली पहलों का भी हिस्सा है।
अहम खनिजों के लिए 11 देशों से सहयोग
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अहम खनिजों तक भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, फ्रांस, जर्मनी, पेरू, जापान, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, मंगोलिया और अमेरिका के साथ साझेदारी और सहयोग समझौते संपन्न किए हैं। इसके अतिरिक्त, भारत मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप (एमएसपी) / फोरम ऑन रिस्पॉन्सिबल जियोस्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट और अहम खनिजों पर क्वाड फ्रेमवर्क जैसी बहुपक्षीय पहलों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा के सरकारी उपाय
विदेश राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने संसद को आश्वस्त किया कि सरकार दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक उपाय कर रही है। इन उपायों में अपशिष्ट से खनिजों की रीसाइक्लिंग, उन्नत टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान और अहम खनिजों से संबंधित सहयोगी अनुसंधान प्रयास शामिल हैं। सरकार ने 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' भी शुरू किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अहम खनिजों की दीर्घकालिक और टिकाऊ आपूर्ति को सुरक्षित करना है। यह मिशन अहम खनिजों की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगा, जिसमें खोज, खनन, बेनिफिसिएशन, प्रोसेसिंग और उपयोग के बाद के उत्पादों से खनिजों की रिकवरी जैसे चरण शामिल हैं।
रणनीतिक खनिजों का बढ़ता महत्व
लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ पृथ्वी तत्व) जैसे अहम खनिज आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनकी आवश्यकता इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बैटरियों, सौर पैनलों, पवन टरबाइनों, सेमीकंडक्टरों, स्मार्टफोन और महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों के निर्माण में अनिवार्य है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, इन खनिजों का खनन और प्रसंस्करण कुछ ही देशों के प्रभुत्व में है। भारत अपनी 'नेट-ज़ीरो' उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और घरेलू विनिर्माण को तेजी से गति देने के लिए इन रणनीतिक खनिजों की निर्बाध आपूर्ति पर जोर दे रहा है, ताकि किसी भी भू-राजनीतिक व्यवधान का देश के उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
