भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 707 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने 707 अरब डॉलर का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। यह देश की बढ़ती आर्थिक साख का प्रमाण है।

संवाददाता: शाश्वत तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 अगस्त 2026
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपने विदेशी मुद्रा भंडार को 14.1 अरब डॉलर के उछाल के साथ 707 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। यह चालू वित्त वर्ष का अब तक का सर्वोच्च स्तर है। इस वृद्धि में विदेशी मुद्रा संपत्ति में 9.9 अरब डॉलर और सोने के भंडार में 3.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी शामिल है, जो देश की बाहरी वित्तीय मजबूती को लगातार बढ़ा रही है।
इस ऐतिहासिक आंकड़े पर विदेश मंत्रालय ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के कूटनीतिक मामलों से जुड़े आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल 'इंडिया डिप्लोमेसी' ने इसे 'रिकॉर्ड स्तर पर लगाई गई छलांग' बताते हुए कहा कि यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक साख का प्रतीक है। वहीं, न्यूयॉर्क, ऑस्ट्रेलिया और चिली स्थित भारतीय राजनयिक मिशनों ने भी इस डेटा को साझा करते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड भंडार वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की वित्तीय स्थिरता और दीर्घकालिक नीतिगत विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा।
आर्थिक मजबूती और कूटनीतिक लाभ
कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का यह अभूतपूर्व स्तर भारत के लिए एक 'सुरक्षा कवच' का काम करेगा। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रुपये को स्थिरता प्रदान करेगा और वैश्विक मंदी या युद्ध जैसी विपरीत परिस्थितियों में भारत की कूटनीतिक सौदेबाजी की क्षमता को बढ़ाएगा। विदेश मंत्रालय का यह सकारात्मक रुख यह दर्शाता है कि सरकार विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रही है।
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों, जैसे एफसीएनआर-बी डिपॉजिट स्कीम, के कारण देश में 40 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूंजी आई है। इन प्रयासों ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और लाल सागर जैसे संकटों के बावजूद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संदेश दिया है।
