भारत-भूटान सहयोग: 100 अरब के विकास पैकेज की हुई व्यापक समीक्षा
भारत और भूटान ने 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 100 अरब रुपये की विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी, 45 इलेक्ट्रिक वाहन सौंपे गए।

द क्लिफ न्यूज़ | 31 जुलाई 2026
भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-2029) के तहत भारत द्वारा प्रस्तावित 100 अरब रुपये के विकास पैकेज से जुड़े महत्वपूर्ण परियोजनाओं की गुरुवार को नई दिल्ली में व्यापक समीक्षा की गई। थिम्पू में आयोजित 5वीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता (प्लान टॉक्स) में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने द्विपक्षीय रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया।
इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भूटान के विदेश सचिव पेमा लेक्तुप दोरजी के निमंत्रण पर द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा की। अपनी यात्रा के दौरान, विदेश सचिव मिसरी ने महामहिम राजा से मुलाकात की, तथा प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे और विदेश एवं बाहरी व्यापार मंत्री ल्योंपो डी.एन. ढुंगेल से भी भेंट की। इस दौरान ऊर्जा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और जन-संपर्क जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
नई परियोजनाओं को मिली मंजूरी, विकास कार्यों को मिलेगी गति
वार्ता के दौरान, कुल 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनकी अनुमानित लागत 332 करोड़ रुपये है। इन नई परियोजनाओं में बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शहरी सुविधाएं और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इन नई स्वीकृतियों के साथ, भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत अब तक कुल 82 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनकी कुल लागत 6,860 करोड़ रुपये आंकी गई है।
भारत सरकार ने विशेष प्रोत्साहन योजना (ईएसपी) के लिए 1,250 करोड़ रुपये, उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजनाओं (एचआईसीडीपी) के लिए 735.20 करोड़ रुपये और प्रोग्राम ग्रांट के लिए 200 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इन फंडों के प्रभावी उपयोग और संबंधित परियोजनाओं की प्रगति की भी बैठक में विस्तृत समीक्षा की गई।
पर्यावरण और ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के प्रयास
दोनों देशों के विदेश सचिवों ने 'थिम्पू में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और ओपन स्पेस' परियोजना के अंतर्गत विकसित किए गए थिम्पू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन भी किया। यह परियोजना भूटान की राजधानी में हरित आवरण और सार्वजनिक स्थानों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसके अतिरिक्त, 'भूटान में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देना' नामक परियोजना के तहत 45 इलेक्ट्रिक वाहनों को भी भूटान को सौंपा गया। यह पहल भूटान में टिकाऊ परिवहन को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत अपनी 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत भूटान के समग्र विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। भूटान की पंचवर्षीय योजनाओं के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही यह भारी विकास सहायता, दोनों देशों के बीच मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रमाण है।
