भागवत कथा में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन, श्रद्धालुओं ने की जयकारे
मीरजापुर के तेंदुई गांव में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन पं. पवन कुमार महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार से पूर्व की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण प्राणियों के जीवनदाता हैं।

संवाददाता: शशि भूषण दूबे कंचनीय वरिष्ठ पत्रकार एवं गिरिजा शंकर त्रिपाठी की खास रिपोर्टिंग
द क्लिफ न्यूज़ | मीरजापुर | 3 सितंबर 2026
हलिया (मीरजापुर) क्षेत्र के तेंदुई गांव स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण किया। कथावाचक पं. पवन कुमार महाराज ने दशम स्कंध के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए भगवान के अवतार से पूर्व की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण समस्त प्राणियों के जीवनदाता हैं और वे प्रत्येक जीव के हृदय में परमात्मा के रूप में विराजमान हैं।
पं. पवन कुमार महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं मानव जीवन को सत्य, धर्म और कल्याण का मार्ग दिखाती हैं। श्रद्धा और अटूट भाव से भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य के भीतर भक्ति का जागरण होता है। यह भक्ति ही क्रोध, मोह और लोभ जैसी नकारात्मक भावनाओं को दूर कर मनुष्य को सद्मार्ग की ओर ले जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का नाम मात्र ही दुखों के भवसागर से पार लगाने वाली नौका के समान है।
पृथ्वी का भार और देवकी-वासुदेव का प्रसंग
कथा के दौरान, कथावाचक ने पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचार और अधर्म के दुर्दिनों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी पर पाप और अधर्म अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया, तो पृथ्वी स्वयं गाय का रूप धारण कर करुण विलाप करती हुई ब्रह्माजी की शरण में पहुंची। ब्रह्मा सहित सभी देवताओं ने क्षीरसागर के तट पर पहुंच भगवान विष्णु की स्तुति की। देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान ने पृथ्वी का भार कम करने के उद्देश्य से श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेने का निर्णय लिया। साथ ही, उन्होंने सभी देवताओं को भी अपने-अपने अंश के साथ पृथ्वी पर जन्म लेने का निर्देश दिया।
इसके उपरांत, कथा में वासुदेव और देवकी के विवाह का प्रसंग सुनाया गया, जिसके तत्काल बाद कंस को हुई आकाशवाणी का उल्लेख किया गया। आकाशवाणी के माध्यम से कंस को सूचित किया गया कि देवकी की आठवीं संतान उसके वध का कारण बनेगी। इस भविष्यवाणी को सुनकर कंस क्रोधित हो उठा और देवकी को मारने के लिए तलवार लेकर दौड़ा, परंतु वासुदेव ने सूझबूझ का परिचय देते हुए उसे शांत कराया।
श्रद्धालुओं का उत्साह और जयकारे
कथा में जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के समय का मार्मिक वर्णन शुरू हुआ, पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरा वातावरण भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। मुख्य यजमान अंतरराष्ट्रीय संत बाल योगी संजय महाराज और अमरनाथ तिवारी-जानकी देवी ने विशेष आरती में भाग लिया। कथा में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का आनंद ले रहे थे।
