भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण दिवस पर इटावा में भक्तों ने चढ़ाया निर्वाण लाडू
इटावा में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण महोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। श्रद्धालुओं ने जिनालयों में विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान को निर्वाण लाडू समर्पित किया।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 19 अगस्त 2026
जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण महोत्सव बुधवार को इटावा के विभिन्न जिनालयों में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर जैन धर्मावलंबियों ने भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा के समक्ष विशेष निर्वाण लाडू अर्पित कर पूजा-अर्चना की, जो उनके जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है।
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर अतिशय क्षेत्र नसियां जी में सुबह से ही जैन समाज के महिला, पुरुष और बच्चों का पहुंचने का क्रम जारी रहा। पीत वस्त्र धारण किए समाज के पुरुषों तथा कमेटी सदस्यों ने श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की। राजेश एंड म्यूजिक ग्रुप के भजनों और पूजन-पाठ के मध्य सुबह 10 बजे भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में भाग लिया।
निर्वाण लाडू का महत्व
जैन परंपरा के अनुसार, भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस पर चढ़ाया जाने वाला निर्वाण लाडू उनकी आत्मा के जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्ति का प्रतीक है। यह उत्सव भगवान द्वारा समस्त कर्मों का नाश कर अनंत सुख की प्राप्ति की स्मृति में मनाया जाता है। इस अवसर पर नसियां जी कमेटी के अध्यक्ष संजू जैन ठेकेदार, महामंत्री धर्मेंद्र जैन, उपाध्यक्ष अजीत बाबू जैन, विश्व जैन संगठन अध्यक्ष आकाश दीप जैन, जैन मिलन महिला शाखा महामंत्री लवली जैन, डीके जैन, प्रदीप जैन, मोहित जैन, श्रेयांश जैन, राजू जैन, कमोद जैन, राहुल जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुनि श्री विशल्य सागर महाराज के प्रवचन
वहीं, लालपुरा स्थित श्री जैन मंदिर में मुनि श्री 108 विशल्य सागर महाराज के सानिध्य में प्रातः 7 बजे श्रीजी का जलाभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। शांतिधारा का सौभाग्य निशांक जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इसके उपरांत कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। डॉ. अरविंद जैन परिवार को सौधर्म इंद्र तथा पीयूष जैन, विजय जैन, रितेश जैन, बंटी बनारस जैन आदि को अन्य इंद्र बनने का सौभाग्य मिला। संगीत के साथ भक्तिमय पूजन-पाठ का कार्यक्रम भी आयोजित हुआ।
भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य रमेश जैन एवं कुलदीप जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री विशल्य सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए बताया कि भगवान पार्श्वनाथ ने झारखंड स्थित सम्मेद शिखरजी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण सम्मेद शिखरजी सहित देशभर के जैन मंदिरों में यह पर्व विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान का निर्वाण जन्म-मरण के चक्र और समस्त कर्मों से मुक्ति का प्रतीक है।
इस वर्षायोग समिति के अध्यक्ष संजू जैन ठेकेदार, महामंत्री बंटी जैन, कोषाध्यक्ष रितेश जैन सहित पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने भी इस आयोजन में भाग लिया। नगर के नया शहर, करनपुरा, छपैटी, सराय शेख तथा एसडी फील्ड स्थित जैन मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने पूर्ण भक्तिभाव के साथ भगवान पार्श्वनाथ को निर्वाण लाडू अर्पित किए।
