बेनेट फ्रैक्चर: अंगूठे के जोड़ की स्थिरता पर विशेष ध्यान जरूरी
पहली मेटाकार्पल हड्डी के आधार पर होने वाला बेनेट फ्रैक्चर, अंगूठे के सीएमसी जोड़ की स्थिरता को प्रभावित करता है। हड्डी के टूटने के साथ-साथ जोड़ की सही स्थिति बनाए रखना उपचार का मुख्य उद्देश्य है।

द क्लिफ न्यूज़ | 17 सितंबर 2026
हाथ के अंगूठे में होने वाला बेनेट फ्रैक्चर, जो पहली मेटाकार्पल हड्डी के आधार पर पहली कार्पोमेटाकार्पल (सीएमसी) जोड़ तक फैलता है, एक जटिल चोट है। इस प्रकार के फ्रैक्चर में न केवल हड्डी का टूटना, बल्कि उस जोड़ की स्थिरता को बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अंगूठे का सीएमसी जोड़ वस्तुओं को पकड़ने, उठाने और चुटकी लेने जैसी दैनिक क्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके उपचार में हड्डी के जुड़ने के साथ-साथ जोड़ की सही स्थिति को बहाल करना सर्वोपरि है।
यह चोट अक्सर तब लगती है जब मुड़े हुए अंगूठे पर अचानक तेज दबाव पड़ता है। गिरने के दौरान शरीर का भार हाथ और अंगूठे पर आ जाना, अंगूठे पर सीधी मार लगना या किसी दुर्घटना में अंगूठे पर अत्यधिक बल लगना इसके सामान्य कारण हैं। चोट के तुरंत बाद अंगूठे के आधार पर तीव्र दर्द, सूजन और पहले सीएमसी जोड़ को छूने पर असहनीय पीड़ा हो सकती है। अंगूठे को हिलाने-डुलाने, कोई वस्तु पकड़ने या चुटकी बनाने में कठिनाई का अनुभव होता है। कुछ मामलों में, जोड़ में अस्थिरता या अंगूठे के आधार पर स्पष्ट विकृति भी दिखाई दे सकती है।
फ्रैक्चर की विशिष्ट प्रकृति और निदान
बेनेट फ्रैक्चर की विशेषता इसके फ्रैक्चर पैटर्न से है। इसमें पहली मेटाकार्पल हड्डी के आधार का एक छोटा वोलर-अलनर टुकड़ा, जो ट्रेपेज़ियम हड्डी से एंटीरियर ऑब्लिक लिगामेंट द्वारा जुड़ा होता है, अपनी जगह पर बना रह सकता है। वहीं, पहली मेटाकार्पल हड्डी का शेष भाग ऊपरी शरीर की मांसपेशियों, विशेष रूप से एबडक्टर पॉलिसिस लॉन्गस के खिंचाव के कारण पीछे, रेडियल (अंगूठे की ओर) और ऊपर की ओर खिसक जाता है। इस खिंचाव के कारण सीएमसी जोड़ अपनी सामान्य स्थिति से खिसक जाता है (सब्लक्सेशन) या पूरी तरह अपनी जगह से हट जाता है (डिसलोकेशन)।
इस चोट के निदान के लिए अंगूठे और संपूर्ण हाथ के एक्स-रे की आवश्यकता होती है। आमतौर पर एपी (एंटीरियर-पोस्टीरियर), लेटरल (पार्श्व) और ऑब्लिक (तिर्यक) व्यू लिए जाते हैं। इन एक्स-रे से फ्रैक्चर की गंभीरता, हड्डी के टुकड़ों के विस्थापन की मात्रा और सीएमसी जोड़ की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाता है। यदि फ्रैक्चर की जटिलता अधिक है या एक्स-रे से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाती है, तो डॉक्टर कंप्यूटर टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन की सलाह भी दे सकते हैं, जो हड्डी और जोड़ की 3D इमेजिंग प्रदान करता है।
उपचार के तरीके: गैर-सर्जिकल से सर्जिकल तक
बेनेट फ्रैक्चर के उपचार का प्राथमिक लक्ष्य पहली मेटाकार्पल हड्डी और सीएमसी जोड़ को यथासंभव उसकी मूल शारीरिक स्थिति में वापस लाना और उसे स्थिर बनाए रखना है। यदि फ्रैक्चर में हड्डी का खिसकाव कम हो और जोड़ स्थिर अवस्था में हो, तो गैर-सर्जिकल उपचार का विकल्प चुना जा सकता है। इसमें अंगूठे को एक विशेष 'थंब-स्पाइका' स्प्लिंट या कास्ट का उपयोग करके स्थिर किया जाता है। इस दौरान नियमित अंतराल पर एक्स-रे के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि हड्डी और जोड़ अपनी सही स्थिति में बने हुए हैं और उनमें कोई अनावश्यक हलचल नहीं हो रही है।
जब फ्रैक्चर में हड्डी का विस्थापन अधिक हो या जोड़ अस्थिर हो, तो सर्जिकल हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है। 'क्लोज्ड रिडक्शन' की प्रक्रिया में, बिना चीरा लगाए, हड्डी के टुकड़ों और जोड़ को सही स्थिति में लाने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद, 'परक्यूटेनियस K-वायर फिक्सेशन' के माध्यम से हड्डी को स्थिर किया जाता है, जिसमें पतली तारें (K-wires) हड्डी के टुकड़ों से गुजारकर उन्हें आपस में जोड़े रखती हैं।
कुछ मामलों में, यदि क्लोज्ड रिडक्शन से फ्रैक्चर को सही स्थिति में लाना संभव न हो, विस्थापन बहुत अधिक हो, या फ्रैक्चर का स्वरूप जटिल आर्टिकुलर (जोड़ से संबंधित) हो, तो 'ओपन रिडक्शन और इंटरनल फिक्सेशन' (ORIF) की सलाह दी जाती है। इस सर्जिकल प्रक्रिया में, चीरा लगाकर फ्रैक्चर वाले स्थान तक पहुंचा जाता है, हड्डी के टुकड़ों को स्पष्ट रूप से देखा जाता है और फिर प्लेट, स्क्रू या अन्य इम्प्लांट का उपयोग करके उन्हें स्थायी रूप से स्थिर किया जाता है।
पुनर्प्राप्ति और सावधानी
बेनेट फ्रैक्चर के प्रभावी उपचार का मुख्य सिद्धांत सीएमसी जोड़ को उसकी सही शारीरिक स्थिति में पुनर्स्थापित करना, जोड़ की सतह को यथासंभव ठीक करना और एक मजबूत, स्थिर फिक्सेशन सुनिश्चित करना है। समय पर निदान और उचित उपचार से अंगूठे की पकड़ की शक्ति, चुटकी लेने की क्षमता और हाथ की समग्र कार्यक्षमता को प्रभावी ढंग से संरक्षित किया जा सकता है।
चोट के बाद होने वाले लगातार दर्द, असामान्य सूजन, विकृति या अंगूठे की गति में कमी को सामान्य चोट समझकर नजरअंदाज करना गंभीर हो सकता है। ऐसे किसी भी लक्षण को गंभीरता से लेते हुए तत्काल किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञ द्वारा की गई जांच और समय पर सही उपचार से जटिलताओं को रोका जा सकता है और अंगूठे की कार्यक्षमता को काफी हद तक बहाल किया जा सकता है।
