बसपा से अशोक सिद्धार्थ निष्कासित: मायावती का अनुशासन पर कड़ा प्रहार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अनुशासनहीनता के आरोप में पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई 2027 यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हुई है।

द क्लिफ न्यूज़ | लखनऊ | 2 अगस्त 2026
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी में अनुशासन बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व राज्यसभा सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते की गई है, जिसका उद्देश्य 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर संगठन को मजबूत करना है।
अशोक सिद्धार्थ बसपा में एक लंबे समय से सक्रिय सदस्य रहे हैं और उन्होंने पार्टी के भीतर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक के पद पर भी रह चुके हैं। उनकी निष्कासन की खबर इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि वह बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद के ससुर भी हैं। यह पार्टी के भीतर एक उल्लेखनीय राजनीतिक घटनाक्रम है, जो आगामी चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों को रेखांकित करता है।
अनुशासन और संगठन को मजबूत करने पर मायावती का जोर
सूत्रों के अनुसार, बसपा सुप्रीमो मायावती संगठन में किसी भी प्रकार की शिथिलता या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। इससे पहले भी अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित किया गया था, लेकिन सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के बाद उन्हें संगठन में वापस ले लिया गया था। हालांकि, इस बार की कार्रवाई को अधिक गंभीर माना जा रहा है।
हाल के दिनों में, मायावती ने पार्टी के भीतर सांगठनिक बदलावों और सक्रियता पर जोर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हालिया पोस्ट में यह संकेत दिया था कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि शुरुआती चरण में लगभग 15 से 18 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है।
बसपा प्रमुख का यह निर्णय पार्टी के भीतर एक स्पष्ट संदेश देता है कि अनुशासन सर्वोपरि है और संगठन में किसी भी प्रकार के आंतरिक मतभेद या निष्क्रियता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई को आगामी चुनावों के लिए पार्टी को एकजुट और केंद्रित करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की ओर से अशोक सिद्धार्थ के निष्कासन के संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।
