बारिश ने खोली आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के करोड़ों के पुनर्निर्माण की पोल, छत से टपका पानी
आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर भारी बारिश के दौरान छत, फॉल सीलिंग और पंखों से पानी टपकने का वीडियो वायरल हुआ है। करोड़ों की लागत से हुए पुनर्निर्माण के बावजूद व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | आजमगढ़ | 26 अगस्त 2026
आजमगढ़ रेलवे स्टेशन पर हाल ही में हुई भारी बारिश ने करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण के दावों की पोल खोल दी है। प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर बारिश के दौरान छत, फॉल सीलिंग और पंखों से पानी झरने की तरह टपकता नजर आया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यात्रियों के लिए लगाया गया टीन शेड भी इस समस्या से निपटने में बेअसर साबित हुआ।
बारिश ने स्टेशन परिसर की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्लेटफॉर्म पर पानी भरने के साथ-साथ ड्रेनेज पाइप फटने से गंदा पानी भी फैल गया, जिससे यात्रियों को आवाजाही में भारी परेशानी हुई और उनके फिसलने का खतरा भी बढ़ गया।
बिजली के उपकरणों के पास पानी का रिसाव: सुरक्षा पर गंभीर संकट
सबसे चिंताजनक स्थिति स्टेशन के उन हिस्सों में देखी गई जहां छत से टपकता पानी सीधे पंखों और अन्य विद्युत उपकरणों के पास पहुंच रहा था। रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थान पर बिजली के तारों, पंखों और अन्य विद्युत उपकरणों के समीप पानी का रिसाव एक बड़ा सुरक्षा जोखिम पैदा करता है। यात्रियों में करंट उतरने की आशंका को लेकर दहशत का माहौल रहा। कई यात्रियों को बारिश से बचने के लिए इधर-उधर शरण लेनी पड़ी। वायरल वीडियो में स्टेशन की छत और फॉल सीलिंग से लगातार पानी गिरता हुआ स्पष्ट दिख रहा है, जो निर्माण की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के दावों पर सवालिया निशान
आजमगढ़ रेलवे स्टेशन का विकास और आधुनिकीकरण अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत स्टेशन के पुनर्विकास और यात्री सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के दावे किए गए थे। इन दावों के बावजूद, पहली ही तेज बारिश में इस तरह छत और फॉल सीलिंग से पानी का रिसना निर्माण की गुणवत्ता, जल निकासी प्रणाली और स्टेशन के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अमृत भारत स्टेशन योजना का मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं, बेहतर यात्री अनुभव, उत्कृष्ट साफ-सफाई, सुगम आवागमन और मजबूत आधारभूत ढांचे से सुसज्जित करना है। यदि भारी बारिश में यात्रियों को छत से गिरते पानी और बिजली के संभावित खतरों से जूझना पड़े, तो यह स्पष्ट रूप से मौजूदा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।
सौंदर्यीकरण के साथ-साथ सुरक्षा और गुणवत्ता की अनिवार्यता
रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण में केवल बाहरी सुंदरता और नई संरचनाओं का निर्माण पर्याप्त नहीं है। छत की वाटरप्रूफिंग, बारिश के पानी की प्रभावी निकासी, सुदृढ़ ड्रेनेज पाइपलाइन, फॉल सीलिंग की मजबूती, विद्युत सुरक्षा मानक और समग्र निर्माण की गुणवत्ता जैसे पहलू समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। बारिश के दौरान सामने आई समस्या ने इस बात पर जोर दिया है कि क्या पुनर्विकास कार्य के दौरान जल निकासी और वाटरप्रूफिंग की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। यदि निर्माण पर भारी धनराशि खर्च होने के बावजूद पहली ही तेज बारिश में पानी का इस तरह रिसाव हो रहा है, तो जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही निश्चित रूप से तय होनी चाहिए।
यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता, तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग
रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। बिजली के उपकरणों के आसपास पानी का जमावड़ा किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। रेलवे प्रशासन को ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की तत्काल जांच करानी चाहिए, विद्युत व्यवस्था को सुरक्षित करना चाहिए, रिसाव वाले हिस्सों की शीघ्र मरम्मत करानी चाहिए और ड्रेनेज व्यवस्था को सुचारू बनाना चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि स्टेशन के पुनर्विकास में इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री और कार्यप्रणाली निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं। यदि निर्माण में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार और निर्माण की देखरेख करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई जवाबदेही की मांग
बारिश के दौरान स्टेशन की इस दयनीय स्थिति का वीडियो सामने आने के बाद, यात्रियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने आधुनिक स्टेशन के दावों पर सवाल उठाते हुए प्लेटफॉर्म पर ऐसी दुर्दशा के कारणों पर जवाब मांगा है। अब सबकी निगाहें रेलवे प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि वायरल वीडियो को गंभीरता से लिया जाएगा, स्टेशन का गहन तकनीकी निरीक्षण कराया जाएगा और बारिश के पानी के रिसाव व ड्रेनेज की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।
