बरेली में मूसलाधार बारिश ने धान की पकी फसल बर्बाद की, किसानों को भारी नुकसान
बरेली में शुक्रवार शाम से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी धान की पकी फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है।...

बरेली उत्तर प्रदेश | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 27 सितंबर 2026
बरेली जिले के ग्रामीण इलाकों में शुक्रवार की शाम से शुरू हुई मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
तेज हवाओं के झोंकों के कारण धान की पकी बालियां सीधे पानी के संपर्क में आ गई हैं। खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने से दानों के गलने और फसल की गुणवत्ता में गिरावट आने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। चारों ओर खेतों में पानी भरा नजर आ रहा है, जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
धान की फसल पर संकट
आसमानी आफत के चलते तैयार धान की फसल खेतों में बिछ गई है। तेज हवाओं और बारिश के संगम ने किसानों की वर्षों की मेहनत को एक झटके में तबाह कर दिया है। धान की बालियां अब खेतों में भरे पानी में डूबी हुई हैं, जिससे दाने सड़ने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है। यह स्थिति बरेली के कई ग्रामीण इलाकों में देखी जा रही है, जहां किसान अपनी फसल को बचाने के लिए बेबस नजर आ रहे हैं। जलभराव के कारण धान की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है, जिससे किसानों को बाजार में उचित मूल्य मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है।
सब्जी की फसलों पर भी कहर
मीरगंज तहसील के लाभेड़ा दुर्गा प्रसाद गांव के निवासी हरीश राजपूत ने बताया कि धान और गन्ने के अलावा मिर्च व अन्य पत्तेदार सब्जियों को भी भारी क्षति पहुंची है। खेतों में हाल ही में बोई गई पालक, मेथी और मूली की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई। इसके साथ ही फूलगोभी, पत्तागोभी और टमाटर की तैयार पौध जलमग्न होने से पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसानों ने काफी महंगा बीज खरीदकर टमाटर की पौध तैयार करवाई थी, जो अब नष्ट हो चुकी है।
इसी तरह, अन्य सब्जी उत्पादक किसान भी गहरी चिंता में हैं। विशेष रूप से, टमाटर की खेती करने वाले किसानों को बड़ा झटका लगा है, जिनकी नर्सरी अब पानी में डूबकर पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। इन युवा पौधों को तैयार करने में किसानों ने काफी समय और संसाधन निवेश किए थे। अन्य मौसमी सब्जियों जैसे फूलगोभी और पत्तागोभी की फसलें भी जल जमाव का शिकार हो गई हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और बाज़ार मूल्य दोनों प्रभावित होंगे।
किसानों की मुआवजे की मांग
इस प्राकृतिक आपदा से ओम प्रकाश मौर्य, होरी लाल, मुनीश राजपूत, राज कुमार राजपूत, राजेंद्र सिंह, राम बहादुर, राम स्वरूप, सोम पाल, बिजेन्द्र पाल कश्यप और प्यारे दिवाकर सहित कई किसान प्रभावित हुए हैं। इन सभी किसानों की फसलें पानी में डूब जाने से वे बेहद चिंतित हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि खेतों से पानी जल्द ही नहीं निकाला गया तो बची-खुची फसल भी सड़ जाएगी। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि यह बेमौसम बरसात उनके लिए दोहरी मार लेकर आई है। एक ओर जहाँ धान की पकी फसल बर्बाद हो गई है, वहीं दूसरी ओर मौसमी सब्जियों की नर्सरी और तैयार फसलें भी नष्ट हो गईं। यह उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और इस नुकसान की भरपाई उनके लिए एक बड़ी चुनौती है। प्रभावित किसानों ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज और हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की अपील की है, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें और अपने परिवारों का भरण-पोषण जारी रख सकें।
