बरेली में मेगा विधिक सहायता शिविर: न्याय और योजनाओं का लाभ पहुंचा लोगों तक
बरेली के जीआईसी ऑडिटोरियम में आयोजित मेगा विधिक सहायता एवं जनकल्याणकारी शिविर में जिलाधिकारी और एसपी सिटी ने सरकारी योजनाओं व विधिक अधिकारों के प्रति...

बरेली उत्तर प्रदेश | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 1 नवंबर 2026
समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने और पात्र नागरिकों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से रविवार को बरेली के जीआईसी ऑडिटोरियम में एक वृहद विधिक सहायता एवं जनकल्याणकारी शिविर का सफल आयोजन किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बरेली द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी अविनाश कुमार और एसपी सिटी चिराग जैन सहित कई न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विधिक अधिकारों और निःशुल्क कानूनी सहायता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का कोई भी व्यक्ति धन के अभाव में न्याय से वंचित न रहे, इसके लिए विधिक सेवा प्राधिकरण पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आमजन से अपने कानूनी अधिकारों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए लगे स्टॉल
शिविर में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा अलग-अलग स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर संबंधित विभागों के अधिकारियों ने नागरिकों को उनकी विभागीय सेवाओं एवं विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। इस दौरान पात्र लाभार्थियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनकर उनके त्वरित निस्तारण हेतु आवश्यक कदम उठाए गए।
न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों का समन्वय
आयोजित शिविर में न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जो योजनाओं को प्रभावी ढंग से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम का संचालन अपर जिला जज राघवेंद्र मणि त्रिपाठी एवं सिविल जज नैंसी तिवारी ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के कर्मचारी, पराविधिक स्वयंसेवक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। शिविर का मुख्य उद्देश्य शासन की योजनाओं को अंतिम नागरिक तक पहुंचाना और जरूरतमंदों को विधिक सुरक्षा प्रदान करना रहा, जिससे विधिक साक्षरता के प्रति जन जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
