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बलरामपुर रामलीला में राम-भरत मिलाप का भावुक मंचन, सीता हरण भी हुआ

बलरामपुर में रामलीला के छठे दिन राम-भरत मिलाप और सीता हरण का भावुक मंचन हुआ। भरत ने श्रीराम की चरण पादुकाएं ग्रहण कीं, वहीं साधु...

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•संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
बलरामपुर रामलीला में राम-भरत मिलाप का भावुक मंचन, सीता हरण भी हुआ

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल

द क्लिफ न्यूज़ | 17 अक्टूबर 2026

बलरामपुर के रामलीला मैदान में श्रीश्री 108 सत्य प्रचारिणी रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला के छठवें दिन रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय और संवादों से दर्शकों को पौराणिक कथा के विभिन्न पड़ावों से जोड़ा, जिसमें राम-भरत मिलाप और सीता हरण के दृश्य विशेष रूप से मार्मिक रहे।

मंचन की शुरुआत भगवान श्रीराम के वन गमन और सरयू नदी पार करने के प्रसंगों से हुई। इस दौरान, राजा दशरथ के प्राण त्यागने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। पिता की मृत्यु और भाई के वनवास की खबर सुनकर भरत और शत्रुघ्न के दुख का मार्मिक चित्रण किया गया।

भरत का चित्रकूट आगमन और पादुका ग्रहण

इसके बाद, भरत ने श्रीराम को अयोध्या वापस लाने का दृढ़ संकल्प लिया और गुरु वशिष्ठ एवं माताओं के साथ चित्रकूट के लिए प्रस्थान किया। चित्रकूट में राम और भरत के मिलन का दृश्य अत्यंत हृदयस्पर्शी था। भरत ने श्रीराम से राजपाट संभालने का आग्रह किया, परंतु श्रीराम ने अपने पिता के वचनों का सम्मान करते हुए वनवास पूरा करने का निर्णय लिया। अंततः, भरत ने प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाएं अपने सिर पर धारण कीं और उन्हें ही अयोध्या के सिंहासन का प्रतीक मानकर लौटने का निर्णय लिया। इस भावुक क्षण में 'राम भक्त ले चला रे राम की निशानी' भजन ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

शूर्पणखा और सीता हरण का मंचन

कथा को आगे बढ़ाते हुए, कलाकारों ने लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने और खर-दूषण वध के दृश्यों का मंचन किया। इसके उपरांत, रावण द्वारा साधु का वेश धारण कर माता सीता का हरण करने के प्रसंग को प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया।

रामलीला मैदान में देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उपस्थित रही। कलाकारों के सजीव प्रदर्शन और प्रभावी संवाद अदायगी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा परिसर 'जय श्रीराम' के नारों से गूंज उठा। समिति के सदस्यों ने बताया कि रामलीला के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस आयोजन में स्थानीय निवासियों की सक्रिय भागीदारी और भक्तिपूर्ण उत्साह सराहनीय रहा। रामलीला का यह मंचन जिले में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।

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