बलरामपुर में वकीलों का आंदोलन गहराया, न्यायिक कार्य ठप, 1200 से अधिक मामले अटके
बलरामपुर में जिलाधिकारी के व्यवहार और नोटिस के विरोध में वकीलों का आंदोलन तेज हो गया है। न्यायिक कार्य ठप होने से 1200 से अधिक...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 22 अक्टूबर 2026
बलरामपुर में जिला प्रशासन और वकीलों के बीच चल रहा टकराव गुरुवार को और अधिक गंभीर हो गया, जिसके परिणामस्वरूप न्यायिक कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है। नामांतरण प्रक्रिया में बदलाव, अधिवक्ता संघ भवन को गिराने संबंधी नोटिस और जिलाधिकारियों के कथित अनुचित व्यवहार के विरोध में अधिवक्ता पंद्रह अक्टूबर से आंदोलनरत हैं। इस गतिरोध के कारण जिले की विभिन्न अदालतों में गुरुवार को बारह सौ पैंतीस से अधिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई, जिससे दूर-दराज से आए वादी मायूस होकर लौटे।
गुरुवार को उतरौला, तुलसीपुर और मुख्यालय के अधिवक्ता एक साथ कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित हुए। इस दौरान कोतवाली देहात पुलिस के साथ हुई झड़प ने प्रदर्शन के तनावपूर्ण माहौल को और बढ़ा दिया। कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद, अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने स्थिति को संभालने और बातचीत के लिए अधिवक्ताओं से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन अधिवक्ताओं ने उनसे किसी भी प्रकार की वार्ता करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
मांगों पर अडिग अधिवक्ता, जिलाधिकारी से सार्वजनिक माफी की अपेक्षा
वकीलों का मुख्य आरोप है कि जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने पूर्व में एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। इसी कारण, अधिवक्ता अब इस बात पर दृढ़ हैं कि जब तक जिलाधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के पश्चात, संयुक्त बार संघ की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि जब तक विवाद का कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकल जाता, तब तक अधिवक्ता किसी भी न्यायिक कार्य में हिस्सा नहीं लेंगे। संघ ने इस कड़े रुख को जिलाधिकारी द्वारा पूर्व में उनके प्रतिनिधिमंडल की उपेक्षा का सीधा परिणाम बताया है।
न्यायिक कार्य बाधित होने से प्रभावित हो रहे वादी
वकीलों की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का सीधा और गंभीर असर आम वादी-प्रार्थियों पर पड़ रहा है। गुरुवार को जिले की विभिन्न अदालतों में कुल बारह सौ पैंतीस मामलों में सुनवाई नहीं हो सकी। इससे उन लोगों को विशेष कठिनाई का सामना करना पड़ा जो अपनी सुनवाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से आए थे। ऐसे वादी खाली हाथ और निराशा के साथ वापस लौटने को मजबूर हुए, जिनका समय और धन दोनों व्यर्थ हुआ। यह स्थिति आम लोगों के लिए न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया को और अधिक दुष्कर बना रही है, क्योंकि उन्हें बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
आगे की रणनीति और प्रस्तावित मौन जुलूस
संयुक्त बार संघ ने अपनी आगामी रणनीति के तहत शुक्रवार को बौद्ध परिपथ पर एक मौन जुलूस निकालने का निर्णय लिया है। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के माध्यम से अधिवक्ता अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से दर्ज कराएंगे और प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास करेंगे। मौन जुलूस के उपरांत, संघ भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन को आगे बढ़ाने की दिशा और उसकी रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णय आंदोलन की भावी दिशा तय करेंगे और यह निर्धारित करेंगे कि यह गतिरोध कब तक जारी रह सकता है।
प्रशासन का पक्ष और वार्ता की तत्परता
वहीं, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने एक पत्र के माध्यम से प्रशासन का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि प्रशासन धारा चौंतीस से संबंधित प्रकरणों पर सार्थक वार्ता करने के लिए पूर्णतः तैयार है। जिलाधिकारी के अनुसार, पूर्व में ज्ञापन देने की सूचना उन्हें समय पर प्राप्त नहीं हो सकी थी, क्योंकि उस दौरान वे अन्य पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन अधिवक्ताओं के साथ संवाद स्थापित करने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का इच्छुक है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अधिवक्ताओं का पक्ष सुनने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के लिए तत्पर हैं। हालांकि, अधिवक्ताओं के वर्तमान रुख के कारण अभी तक किसी भी ठोस परिणाम पर पहुंचना संभव नहीं हो पाया है। जिलाधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि उनकी ओर से किसी भी तरह की द्वेषपूर्ण कार्यवाही का कोई इरादा नहीं है, बल्कि वे केवल नियमों के अनुसार कार्य कर रहे हैं। आंदोलन की अगली दिशा शुक्रवार के मौन जुलूस और उसके बाद होने वाली बैठक के निर्णयों पर निर्भर करेगी, जिसके बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई तय करेगा।
