बलरामपुर में नामांतरण ट्रायल व डीएम के व्यवहार पर अधिवक्ताओं का घेराव
बलरामपुर में नामांतरण प्रक्रिया के ट्रायल और जिलाधिकारी के कथित अनुचित व्यवहार के विरोध में अधिवक्ताओं ने 22 अक्टूबर को जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करने...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 21 अक्टूबर 2026
बलरामपुर जिले में नामांतरण (नाम जोड़ने की) प्रक्रिया के ट्रायल और जिलाधिकारी के कथित अनुचित आचरण के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन उग्र हो गया है। जिला बार संघ, जिला युवा बार संघ और कलेक्ट्रेट बार संघ के संयुक्त तत्वावधान में अधिवक्ताओं ने आगामी बुधवार, 22 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर अपना विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है। इस प्रदर्शन के मद्देनजर अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से पूर्णतः विरक्त रहेंगे।
अधिवक्ताओं की संयुक्त घोषणा और रणनीति
जिला बार संघ के अध्यक्ष मुर्तजा हुसैन, जिला युवा बार संघ के अध्यक्ष मृगेंद्र उपाध्याय और कलेक्ट्रेट बार संघ के अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह ने एक साझा बयान जारी कर इस प्रस्तावित घेराव और कार्य बहिष्कार की जानकारी दी है। यह विरोध प्रदर्शन तहसील सदर से शुरू होगा। तुलसीपुर और उतरौला बार संघ के पदाधिकारियों समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता बुधवार सुबह 11 बजे सदर तहसील में एकत्रित होंगे। इस आंदोलन को लेकर अधिवक्ताओं में काफी रोष व्याप्त है, जिसकी शुरुआत तहसील सदर से होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचेगी।
कलेक्ट्रेट तक मार्च और भविष्य की रणनीति
यहां से अधिवक्ता एक जुलूस के रूप में दीवानी न्यायालय होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचेंगे। कलेक्ट्रेट में वे जिलाधिकारी का घेराव करेंगे। इस घेराव का मुख्य उद्देश्य नामांतरण प्रक्रिया में हो रही कथित खामियों और जिलाधिकारी के व्यवहार को उजागर करना है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि नई नामांतरण प्रक्रिया की ट्रायल प्रणाली अव्यवहारिक है और इससे आम जनता को परेशानी हो रही है। इसके साथ ही, वे जिलाधिकारी के कथित अनुचित आचरण का भी विरोध कर रहे हैं, जिसका उन्होंने प्रत्यक्ष अनुभव किया है। प्रदर्शन के उपरांत, संघ भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। जिला प्रशासन के विरुद्ध अधिवक्ताओं का यह सामूहिक विरोध जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मुख्य मांगें नामांतरण प्रक्रिया में सुधार और जिलाधिकारी द्वारा अधिवक्ताओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना है। यह सामूहिक विरोध दर्शाता है कि अधिवक्ता अपनी समस्याओं को लेकर एकजुट हैं और वे प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है।
