बलरामपुर में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 120 गांवों में जागरूकता अभियान
बलरामपुर में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 120 संवेदनशील गांवों में जागरूकता अभियान चलेगा। जिलाधिकारी ने हॉटस्पॉट की जियो-टैगिंग के निर्देश भी दिए।

बलरामपुर | संवाददाता: प्रमोद पाण्डेय
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 17 सितंबर 2026
बलरामपुर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से एक विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया है। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग द्वारा प्रस्तुत की गई इस योजना के तहत 120 संवेदनशील गांवों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस पहल का मुख्य लक्ष्य जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वन्यजीवों के साथ मानव के टकराव को कम करना है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम केवल घटनाओं के बाद बचाव कार्य तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें पूर्व-नियोजित तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने वन क्षेत्रों से सीधे सटे 120 गांवों में प्रभावी जन-जागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, पूर्व में हुई घटनाओं के विश्लेषण के आधार पर, वन सीमा से लगे प्रमुख हॉटस्पॉट क्षेत्रों की विस्तृत मैपिंग और जियो-टैग्ड डेटाबेस तैयार करने का आदेश दिया गया है। इस कदम से वन्यजीवों की गतिविधियों के पैटर्न को समझने और उनकी निगरानी को अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ाने में मदद मिलेगी।
समन्वित सुरक्षा रणनीति और विभागीय समन्वय
प्रशासन द्वारा मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए एक बहुआयामी सुरक्षा रणनीति तैयार की गई है, जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों के बीच गहन समन्वय स्थापित किया जाएगा। विद्युत विभाग को वन सीमावर्ती गांवों में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने और बिजली के ढीले तारों को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अंधेरे में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। पंचायती राज विभाग के माध्यम से ग्राम प्रधानों को सक्रिय कर विलेज अलर्ट नेटवर्क को सुदृढ़ करने और ग्रामीणों को खुले में शौच से बचने के लिए शौचालयों का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
कृषि विभाग को ऐसे वैकल्पिक फसल चक्र को बढ़ावा देने के लिए निर्देशित किया गया है, जो वन्यजीवों को आकर्षित न करें। वहीं, पशुपालन विभाग को किसानों को उनके पशुधन के टीकाकरण के महत्व और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य विभाग को एंटी-वेनम और एंटी-रैबीज इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल उपचार प्रदान किया जा सके।
त्वरित प्रतिक्रिया दल और सार्वजनिक सहयोग पर जोर
वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने की स्थिति में, पुलिस, एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और वन विभाग को आपसी समन्वय और संयुक्त गश्त करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए 24×7 सक्रिय रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को तैयार रखा जाएगा, जो आधुनिक उपकरणों जैसे थर्मल ड्रोन, कैमरा ट्रैप और नाइट-विजन उपकरणों का प्रभावी उपयोग करेंगी। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले घर से बाहर न निकलें और किसी भी वन्यजीव को घेरने या उसे अनावश्यक रूप से भगाने का प्रयास न करें। वन्यजीवों को देखे जाने की स्थिति में तत्काल स्थानीय नियंत्रण कक्ष को सूचित करने की सलाह दी गई है। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी सोहेलवा सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
