बलरामपुर के पायनियर स्कूल में नौ देवियों का मंचन
बलरामपुर के पायनियर पब्लिक स्कूल में नवरात्रि पर देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का मनमोहक मंचन हुआ। छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भक्तिमय वातावरण बनाया।

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 19 अक्टूबर 2026
बलरामपुर के कालीथान स्थित पायनियर पब्लिक स्कूल एण्ड कॉलेज में सोमवार को नवरात्रि का पर्व उल्लासपूर्ण ढंग से मनाया गया। इस अवसर पर छात्रों ने देवी दुर्गा के नौ रूपों का मनमोहक मंचन कर विद्यालय परिसर में भक्तिमय वातावरण निर्मित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ. एमपी तिवारी, कोषाध्यक्ष मीता तिवारी, प्रबंधक इं. आकाश तिवारी, निदेशक प्रकृति तिवारी, उप प्रधानाचार्या शिखा पाण्डेय और मुख्य समन्वयक सलिल सेठ द्वारा माता रानी की आरती और पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इस दौरान विद्यालय प्रबंधन ने नवरात्रि के आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व पर प्रकाश डाला। प्रबंध निदेशक ने बताया कि यह पर्व शक्ति की उपासना का प्रतीक है, जिसमें महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के नौ रूपों की आराधना की जाती है। उन्होंने दैत्यों के संहार के लिए देवी के प्राकट्य की स्मृति में मनाए जाने वाले इस महोत्सव के महत्व को भी रेखांकित किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजी शाम
विद्यालय परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। आयुशी, श्रृष्टि, शाहवी, रिमिशा, अभिश्री, अधिश्री, जयश्री, अन्नया और अक्षिता ने क्रमशः देवी के नौ स्वरूपों का अभिनय किया। वहीं, उत्कर्ष भण्डारी ने शेर और हर्षिता ने माता दुर्गा के स्वरूप में उपस्थित होकर दर्शकों का हृदय जीत लिया। इन जीवंत प्रस्तुतियों के बाद सभी प्रतिभागियों को विद्यालय प्रबंधन द्वारा टॉफी वितरित कर सम्मानित किया गया।
बच्चों की प्रतिभा की सराहना
कार्यक्रम के समापन पर प्रबंध निदेशक ने बच्चों के अभिनय की मुक्त कंठ से सराहना की और उनके उत्साहवर्धन के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का त्योहार श्रद्धा और उल्लास का एक अनूठा संगम है, जो हमें अपनी सनातन संस्कृति के महत्व से भी जोड़ता है। इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिकाएं पूनम चौहान, उर्वशी शुक्ला, लता श्रीवास्तव, किरन मिश्रा, सची सिंह, रीतू श्रीवास्तव, आकांक्षा और रेशू तिवारी सहित समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर बच्चों की प्रतिभा को सराहा और उन्हें भारतीय संस्कृति के मूल्यों से अवगत कराने के प्रयासों को प्रोत्साहित किया।
