बलरामपुर के पायनियर पब्लिक स्कूल में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर छात्रों ने प्रस्तुत कीं झांकियां
बलरामपुर के पायनियर पब्लिक स्कूल में महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई गई। प्रबंध निदेशक ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला, जबकि छात्रों ने सांस्कृतिक झांकियों से...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 26 अक्टूबर 2026
बलरामपुर स्थित पायनियर पब्लिक स्कूल एण्ड कॉलेज में सोमवार को महर्षि वाल्मीकि की जयंती अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने एकत्र होकर आदि कवि महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ. एम.पी. तिवारी, कोषाध्यक्षा मीता तिवारी, प्रबंधक इं. आकाश तिवारी, निदेशक प्रकृति तिवारी, उप प्रधानाचार्या शिखा पाण्डेय और मुख्य समन्वयक सलिल सेठ सहित समस्त शिक्षक और कर्मचारी मौजूद रहे।
समारोह की शुरुआत विद्यालय के अतिथियों द्वारा महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर की गई। इस दौरान उपस्थित सभी ने श्रद्धापूर्वक उन्हें नमन किया।
महर्षि वाल्मीकि के जीवन और रामायण पर प्रवचन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रबंध निदेशक डॉ. एम.पी. तिवारी ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन वृत्तांत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महर्षि का प्रारंभिक नाम रत्नाकरदास था और उन्हें 'आदि कवि' तथा 'महान संत' जैसी उपाधियों से अलंकृत किया गया है। डॉ. तिवारी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत भाषा में विश्वप्रसिद्ध महाकाव्य 'रामायण' की रचना की, जिसने न केवल भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया, बल्कि पूरे विश्व को नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि रामायण हमें जीवन के सत्य, धर्म और कर्तव्यों का बोध कराती है, और महर्षि वाल्मीकि के शब्द एवं कार्य सदैव सच्चाई और अच्छाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
छात्रों ने सांस्कृतिक झांकियों से महर्षि को किया नमन
समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत की गईं विभिन्न सांस्कृतिक झांकियां रहीं। छात्रों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए महर्षि वाल्मीकि के जीवन के प्रसंगों और रामायण के आदर्शों को जीवंत किया। इन झांकियों के माध्यम से छात्रों ने महर्षि वाल्मीकि के प्रति गहरा सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। विद्यालय प्रबंधन ने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि की जयंती अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस पावन अवसर पर देश भर में श्रद्धालु प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित करते हैं और दीप प्रज्वलित कर महर्षि के प्रति अपना स्नेह प्रकट करते हैं। कई वाल्मीकि मंदिरों को भी विशेष रूप से सजाया जाता है। कार्यक्रम के अंत में, उपस्थित सभी से महर्षि वाल्मीकि के संदेशों को आत्मसात करने और जीवन में उतारने का आह्वान किया गया, जो कलम की शक्ति और नैतिक मूल्यों का स्मरण कराता है।
