बलरामपुर के अभिजीत श्रीवास्तव पंजाब रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट बने
बलरामपुर के अभिजीत श्रीवास्तव ने यूपीएससी सीडीएस-2024 परीक्षा उत्तीर्ण कर पंजाब रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट पद हासिल किया। प्रशिक्षण पूरा होने पर गृह जनपद में उनका भव्य स्वागत हुआ।

संवाददाता: अनिरुद्ध शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 8 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के सादुल्लानगर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नौवाकोल निवासी लाल अभिजीत श्रीवास्तव ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर पंजाब रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति पाकर अपने गृह जनपद का नाम रोशन किया है। यूपीएससी सीडीएस-2024 परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, उन्होंने सफलतापूर्वक एक वर्ष का कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और अब देश सेवा के लिए अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं।
सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर अपने गृह जनपद पहुंचने पर अभिजीत श्रीवास्तव का श्याम विहार मुहल्ले में उनके निवास पर परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, मित्रों और मोहल्लेवासियों द्वारा भव्य एवं गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्हें फूल-मालाओं से लादकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर उनके पिता दुष्यंत कुमार श्रीवास्तव, चाचा आलोक श्रीवास्तव, बुआ, मित्रगण और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। परिजनों और शुभचिंतकों के बीच उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को लेकर अत्यंत उत्साह और खुशी का माहौल देखा गया।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
अभिजीत श्रीवास्तव की सफलता पर स्थानीय लोगों ने कहा कि यह न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण है। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा का स्रोत बनेगी। यह साबित करता है कि दृढ़ संकल्प, कठोर परिश्रम और अटूट अनुशासन के माध्यम से किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। अभिजीत ने देश सेवा के लिए एक प्रतिष्ठित मार्ग चुना है और उनकी यह यात्रा कई युवाओं को सैन्य बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।
अभिजीत श्रीवास्तव, जो दुष्यंत कुमार श्रीवास्तव के पुत्र हैं, ने यूपीएससी द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (सीडीएस-2024) में सफलता प्राप्त की। इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के बाद, उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल होने का अवसर मिला। इसके उपरांत, उन्होंने एक वर्ष तक चलने वाले गहन और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण में भाग लिया। इस प्रशिक्षण काल के दौरान, अभिजीत ने भारतीय सेना की प्रशिक्षण अकादमियों में कठोर अनुशासन, शारीरिक और मानसिक दृढ़ता, नेतृत्व क्षमता और सामरिक कौशल का विकास किया।
उनकी इस उपलब्धि की यात्रा में उनके परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन महत्वपूर्ण रहा है। नौवाकोल ग्राम के इस युवा अधिकारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा और राष्ट्र सेवा की ओर कदम बढ़ाया। यूपीएससी सीडीएस परीक्षा, जो भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारियों की भर्ती के लिए एक प्रतिष्ठित और प्रतिस्पर्धी परीक्षा है, में उनका चयन उनके अकादमिक कौशल और सैन्य सेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
प्रशिक्षण के समापन पर, लेफ्टिनेंट अभिजीत श्रीवास्तव का अपने गृह नगर में वापसी पर जो उत्साहपूर्ण स्वागत हुआ, वह इस बात का प्रतीक है कि समाज अपने नायकों का कितना सम्मान करता है। यह स्वागत समारोह न केवल अभिजीत के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि का उत्सव था, बल्कि यह पूरे समुदाय के लिए गर्व का पल था। स्थानीय निवासियों और गणमान्य व्यक्तियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य और देश सेवा में उनके योगदान के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
इस तरह की सफलताएं दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले युवाओं को प्रेरित करती हैं। यह संदेश देती हैं कि संसाधनों की कमी या पृष्ठभूमि की बाधाएं सफलता के आड़े नहीं आ सकतीं, यदि व्यक्ति में लक्ष्य प्राप्त करने की प्रबल इच्छाशक्ति हो। लेफ्टिनेंट अभिजीत श्रीवास्तव की कहानी क्षेत्र के युवाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो उन्हें अपने सपनों को पूरा करने और राष्ट्र की सेवा में योगदान देने के लिए प्रेरित कर सकती है। उनकी इस यात्रा ने बलरामपुर जिले के युवाओं के बीच सैन्य बलों में शामिल होने के प्रति एक नई जागृति पैदा की है।
