बलरामपुर: कांशीराम आवासों में अनियमितता पर कार्रवाई, 243 पात्रों को मिले आवंटन पत्र
बलरामपुर में कांशीराम आवासों के आवंटन में हुई अनियमितताओं की जांच के बाद 436 आवंटन निरस्त किए गए। शुक्रवार को 243 पात्र आवासविहीन परिवारों को नए आवंटन पत्र सौंपे गए।

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 7 अगस्त 2026
बलरामपुर में मान्यवर कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना के तहत वर्षों से व्याप्त अनियमितताओं और अपात्रों के कब्जे में चल रहे सरकारी आवासों पर जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम में, 243 वास्तविक जरूरतमंद एवं पात्र आवासविहीन परिवारों को उनके नए पक्के आवासों के आवंटन पत्र सौंपे गए। इस पहल से उन गरीब परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से स्थायी आवास की प्रतीक्षा कर रहे थे।
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन के नेतृत्व में हुई इस पारदर्शी कार्रवाई ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही और निष्पक्षता का एक नया मानक स्थापित किया है। कार्यक्रम में सदर विधायक पलटूराम और नगर पालिका परिषद अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह 'धीरू' ने लाभार्थियों को आवंटन पत्र वितरित किए, जिससे इन परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिला है।
अनियमितताओं पर व्यापक जांच और स्थलीय सत्यापन
मान्यवर कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना के तहत वर्ष 2010 में जिला मुख्यालय पर आठ स्थानों पर कुल 600 आवासों का निर्माण कराया गया था। समय के साथ, जनता दर्शन और जनसुनवाई कार्यक्रमों में जिलाधिकारी को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई आवास मूल आवंटियों के बजाय अन्य लोगों द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं, कुछ को किराए पर दिया गया है, और कई लंबे समय से खाली पड़े हैं। इन शिकायतों ने योजना के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया था, जो कि सबसे गरीब और आवासहीन परिवारों को आश्रय प्रदान करना था।
इन गंभीर शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए, जिलाधिकारी ने तत्काल नगर पालिका परिषद और जनपद स्तरीय अधिकारियों को जांच के आदेश दिए। इसके बाद, एक त्रिस्तरीय स्थलीय सत्यापन अभियान चलाया गया। इस व्यापक जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 216 आवासों पर अवैध कब्जा था, जबकि 259 आवास लंबे समय से बंद पड़े थे। यह स्थिति सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और जरूरतमंदों के अधिकारों के हनन का स्पष्ट प्रमाण थी।
न्यायसंगत प्रक्रिया से आवंटन निरस्तीकरण
प्रशासन ने पूरी निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए, सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान किया। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की जल्दबाजी या पक्षपात से बचने का पूरा ध्यान रखा गया। अवैध कब्जे वाले 216 आवासों का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। वहीं, बंद पाए गए 259 आवासों के आवंटियों को अपर जिलाधिकारी के समक्ष 15 दिनों के भीतर आपत्ति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। इस संबंध में स्थानीय नोटिस बोर्डों पर भी विस्तृत सूचना प्रकाशित की गई थी, ताकि किसी को भी अनभिज्ञता का लाभ न मिल सके।
निर्धारित अवधि में कुल 101 आपत्तियां प्राप्त हुईं, जिनकी पुनः जांच अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की संयुक्त समिति द्वारा कराई गई। इस गहन समीक्षा में केवल 27 आपत्तियां ही वैध पाई गईं, जिनमें कुछ ऐसे मामले थे जहां आवंटिती की मृत्यु हो गई थी और उनके परिवार के सदस्य नियमानुसार दावा कर रहे थे, या अन्य जायज कारण थे। वहीं, 74 आपत्तियों को निराधार पाया गया, जिनमें अक्सर ऐसे लोग शामिल थे जिन्होंने बिना किसी अधिकार के आवासों पर कब्जा कर रखा था या उन्हें किराए पर उठा दिया था। इस प्रकार, पूरी जांच और सुनवाई प्रक्रिया संपन्न होने के बाद, 25 अप्रैल 2026 को कुल 436 आवासों का आवंटन निरस्त करने का निर्णय लिया गया, जिससे सरकारी आवासों को उनके वास्तविक हकदार तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
नए पात्रों का चयन और आवास आवंटन
निरस्त किए गए आवासों के पुनः आवंटन के लिए, जिला प्रशासन ने 30 अप्रैल से 10 मई 2026 तक नए आवेदन आमंत्रित किए। इस बार आवेदन प्रक्रिया को लेकर विशेष सावधानी बरती गई ताकि केवल वास्तविक जरूरतमंद ही आवेदन कर सकें। आवेदन प्रक्रिया के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए समाचार पत्रों, नगर पालिका परिषद, सभी विकास खंडों के नोटिस बोर्डों और नगर पालिका के अन्य प्रचार माध्यमों का सहारा लिया गया, ताकि सूचना सभी संभावित लाभार्थियों तक पहुंच सके। इस दौरान कुल 305 नए आवेदन प्राप्त हुए, जो योजना की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
जिलाधिकारी द्वारा गठित पांच सदस्यीय जनपद स्तरीय समिति ने प्रत्येक आवेदन का विस्तृत और निष्पक्ष सत्यापन किया। समिति ने आवेदकों की आर्थिक स्थिति, आवासहीनता और अन्य निर्धारित मापदंडों की गहन जांच की। इस जांच के उपरांत, 243 परिवारों को योजना के लिए पूर्णतः पात्र पाया गया, जिनका सत्यापन संतोषजनक रहा और वे सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करते थे। वहीं, 62 आवेदक अपात्र घोषित किए गए, जिनके दावों में खामियां पाई गईं या वे पात्रता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।
गरीब परिवारों के जीवन में नई आशा का संचार
शुक्रवार को आयोजित भव्य कार्यक्रम में, इन 243 पात्र एवं आवासविहीन परिवारों को उनके नए आशियाने के आवंटन पत्र सौंपे गए। यह क्षण उन परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था, जिन्होंने वर्षों से एक पक्की छत के सपने देखे थे। इस पहल से वर्षों से आवास की आस लगाए बैठे गरीब परिवारों को अब स्थायी और सुरक्षित छत मिल सकेगी, जिससे उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा और उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्राप्त होगा। यह केवल एक आवास का आवंटन नहीं है, बल्कि यह इन परिवारों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी शासन की सभी योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और पात्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। कांशीराम आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण योजनाओं का उद्देश्य अब सही मायने में पूरा होगा। किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल जरूरतमंदों तक ही पहुंचे। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी शिव नारायण सिंह, परियोजना अधिकारी/अधिशासी अधिकारी डूडा लालचंद मौर्य, प्रबंधक अखिलेश सिंह, डूडा के महेंद्र कुमार, देवेश कुमार, कृष्णमुनि, नगर पालिका परिषद के जेई (सिविल) अवनीश यादव, राजस्व निरीक्षक राजेश कुमार, जेई (जल) धर्मेंद्र कुमार गौड़ सहित कई अन्य अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में लाभार्थी मौजूद रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनकर खुशी व्यक्त की।
