बलरामपुर-गोंडा में बनेगा 51वां जिला सहकारी बैंक, किसानों को मिलेगा 3% पर फसल ऋण
उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। बलरामपुर में जिला सहकारी बैंक की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे किसानों को 3% ब्याज पर फसली ऋण उपलब्ध होगा।

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 1 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा और गति देने की तैयारी है। राज्य सरकार किसानों को बेहतर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने, सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने और उर्वरक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिले में जिला सहकारी बैंक की स्थापना की प्रक्रिया को तीव्र गति प्रदान कर रही है। सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में इस महत्वपूर्ण परियोजना पर विस्तृत चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
इस बैठक में मंत्री जे.पी.एस. राठौर ने जोर देकर कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को सशक्त बनाने और सहकारिता व्यवस्था को आधुनिक व आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में, जिला सहकारी बैंक, बलरामपुर की स्थापना का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। बैंक की स्थापना के लिए नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज (NABCONS) द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है और अब बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
प्रदेश का 51वां जिला सहकारी बैंक बनेगा बलरामपुर-गोंडा के लिए केंद्र
मंत्री ने बताया कि जिला सहकारी बैंक, बलरामपुर की स्थापना के साथ ही यह प्रदेश का 51वां जिला सहकारी बैंक बन जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बैंक के कार्यक्षेत्र में बलरामपुर के साथ-साथ गोंडा जिला भी शामिल होगा। वर्तमान में, ये दोनों जिले किसी भी जिला सहकारी बैंक के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत नहीं आते हैं, जिसके कारण स्थानीय किसानों को जिला स्तरीय बैंकिंग सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस नए बैंक की स्थापना से दोनों जनपदों के लाखों कृषकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होने की उम्मीद है।
उन्होंने आगे बताया कि जिला सहकारी बैंक की स्थापना के लिए लगभग 14.90 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इस बैंक के संचालन से किसानों को न केवल बेहतर बैंकिंग सेवाएं मिलेंगी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा।
किसानों को मिलेगी 3% की दर पर फसली ऋण की सुविधा
जिला सहकारी बैंक की स्थापना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को कम ब्याज दर पर फसली ऋण उपलब्ध होना होगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में किसानों को अन्य बैंकों से चार प्रतिशत की ब्याज दर पर फसली ऋण प्राप्त करना पड़ता है। वहीं, नए जिला सहकारी बैंक की स्थापना के बाद, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से मात्र तीन प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर फसली ऋण प्राप्त कर सकेंगे। यह दो प्रतिशत की सीधी बचत किसानों की लागत को काफी कम करेगी, जिससे कृषि गतिविधियों को नई गति मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण और आर्थिक सुदृढ़ीकरण
बैठक में सहकारिता समितियों के आधुनिकीकरण और उन्हें अधिक सक्षम बनाने पर भी विशेष बल दिया गया। मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी सहकारी समितियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे उनके कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गति आएगी। इस पहल से समितियों के प्रबंधन में सुधार होगा और वे किसानों को अधिक कुशलता से सेवाएं प्रदान कर सकेंगी।
इसके अतिरिक्त, समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 10 लाख रुपये तक की शून्य ब्याज (जीरो इंटरेस्ट) क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस सुविधा से सहकारी समितियां अपनी गतिविधियों का विस्तार कर सकेंगी, नई योजनाएं शुरू कर सकेंगी और किसानों को बेहतर कृषि आदानों व अन्य सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेंगी।
उर्वरक वितरण में पारदर्शिता और गुणवत्ता पर जोर
मंत्री ने उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेश में यूरिया एवं अन्य आवश्यक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि प्रत्येक कृषक को निर्धारित मूल्य पर, समयबद्ध, सरल और सुलभ तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। वितरण व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर कृत्रिम अभाव, कालाबाजारी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक सही समय पर मिलना सुनिश्चित हो, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बहुउद्देशीय समितियों का किया निरीक्षण
बैठक के उपरांत, माननीय मंत्री ने बहुउद्देशीय सहकारी समिति (बी-पैक्स) सेखुईकला तथा क्रय-विक्रय समिति भगवतीगंज का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने समितियों की कार्यप्रणाली, अभिलेखों के रखरखाव, किसानों को प्रदान की जा रही सेवाओं और उर्वरक वितरण प्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और सहकारिता संस्थाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उन्हें और अधिक सक्षम, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने पर बल दिया।
इस समीक्षा बैठक में विधायक सदर पल्टूराम, विधायक उतरौला राम प्रताप वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष आरती तिवारी, जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन, जनप्रतिनिधि प्रदीप सिंह, सहकारिता विभाग के प्रबंध निदेशक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। इस दौरान सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों को बेहतर बैंकिंग व ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पारदर्शी उर्वरक वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई, जो प्रदेश के कृषि और ग्रामीण विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
